Saturday, October 8, 2016

किस प्रदेश में कौन सा राजनैतिक दल क्षत्रिय राजपूतों का हितैषी?

किस प्रदेश में कौन सा राजनैतिक दल क्षत्रिय राजपूतों का हितैषी??------

हममे से अधिकतर अक्सर किसी न किसी दल के समर्थक होते हैं भले ही हम इसे खुलकर माने या छिपाने का प्रयास करें।

पर जरूरी नही कि हर बार हर परिस्थिति में एक ही दल का पिछलग्गू बना जाए।
एक ही राजनैतिक दल देश भर के सभी प्रदेशों में क्षत्रिय हित अथवा प्रदेश हित में हो ऐसा बिलकुल नही है,

वर्तमान समय में बीजेपी ही तमाम कमियों के बावजूद राष्ट्रहित में कही जा सकती है क्योंकि किसी भी विपक्षी दल के पास नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व नही है।।
आरक्षण पर अपने भोंडे बयानों और हिन्दू राष्ट्रवाद के मुद्दों की उपेक्षा के बावजूद यह सत्य है कि विपक्षी दलों के राहुल गांधी, मायावती, केजरीवाल, नितीश कुमार, सीताराम येचुरी, लालू प्रसाद, मुलायम सिंह से नरेंद्र मोदी प्रधानमन्त्री के रूप में लाख दर्जे बेहतर हैं।

राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर राष्ट्र स्तर से अलग निर्णय लिए जाने में कोई हर्ज नही है।
अलग अलग राज्यों में राजनैतिक परिस्थितियां भिन्न होती हैं इसलिए आकलन और चयन क्षेत्रीय स्तर पर करना चाहिए।
चयन का मापदण्ड चयनकर्ता के विवेक पर निर्भर करता है
मेरे अनुसार विभिन्न प्रदेशों हेतु सर्वाधिक उपर्युक्त दल निम्न प्रकार हैं।।

1--जम्मू कश्मीर-----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--यहाँ राष्ट्र विरोधी ही क्षत्रिय विरोधी हैं।

जम्मू कश्मीर में बीजेपी सरकार ही राष्ट्र/राज्य और क्षत्रिय हित में है।

2--पंजाब,हरियाणा----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--जाटवादी मानसिकता

कांग्रेज़ और चौटाला की इनेलोद के मुकाबले बीजेपी/अकाली दल ही हरियाणा पंजाब में बेहतर है,पंजाब में अलगाववादी केजरीवाल की पार्टी के समर्थन में हैं उसका जीतना राष्ट्रहित में नही होगा।

3--दिल्ली--
क्षत्रिय हित में---AAP
प्रदेश हित में---कांग्रेस
क्षत्रियों विरोधी--कोई नही

दिल्ली में पहली बार आम आदमी पार्टी ने ही क्षत्रियो को ठीक ठाक प्रतिनिधित्व दिया है, पर अपनी गिरी हुई हरकतों और हाल के केजरी के राष्ट्रद्रोही बयान से इनकी विश्वसनीयता और नीयत संदेहास्पद है।

4--हिमाचल प्रदेश----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी,कांग्रेस दोनों
प्रदेश हित में---बीजेपी,कांग्रेस दोनों
क्षत्रियों विरोधी--ब्राह्मणवाद

हिमाचल प्रदेश में दोनों ही मुख्य दलों में राजपूतो का वर्चस्व है,इन्हें बारी बारी से आजमाया जा सकता है, चर्चा है कि बीजेपी हिमाचल प्रदेश में जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट कर रही है,अगर कांग्रेस सरकार ने सही विकास किया हो तो इस परिस्थिति में उसे दोबारा आजमाने में कोई हर्ज नही है।।

5--उत्तराखण्ड----
क्षत्रिय हित में---कांग्रेस
प्रदेश हित में---कांग्रेस
क्षत्रियों विरोधी--ब्राह्मणवाद

उत्तराखण्ड में अभी तक बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने राजपूतो की उपेक्षा की है किन्तु अब कांग्रेस ने हरीश रावत को सीएम बनाया है जो राज्य का भरपूर विकास कर रहे हैं,अत: उत्तराखण्ड में पुन: हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने में कोई हर्ज नही है।

6--उत्तर प्रदेश-----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--बसपा, सपा, दलितवाद, पूरब में ब्राह्मणवाद, मध्य ओर पश्चिम उत्तर प्रदेश में अहीरवाद, जाट-गूजरवाद, मुस्लिमवाद

उत्तर प्रदेश में पिछले डेढ़ दशक से सपा बसपा के शासन की वजह से उनके कोर वोटबैंक अहीर, मुस्लिम और दलितों की ताकत बहुत बढ़ गयी है,
क्षत्रिय राजपूत,स्वर्णो और बाकि हिंदुओं की हालत इनकी प्रजा जैसी हो गयी हैं।
सपा बसपा की सरकारो में सिर्फ अहीर मुस्लिम और दलितों को ही ताकत,नोकरिया,सरकारी ठेके,सम्मान मिलता है।
ये दल राजपूतों को सांसद विधायक के टिकट और मंत्री पद तो देते हैं पर कभी सत्ता में भागीदारी न देकर राजपूतो को तुच्छ सूबेदार बनाकर रखना चाहते हैं,
और इन राजपूत सूबेदारों को भी जब चाहे जलील करके दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर देते हैं।
राजा भैया, अमर सिंह, राजा महेंद्र अरिदमन सिंह भदावर,आनन्द सिंह, राजकिशोर सिंह, धनञ्जय सिंह, बादशाह सिंह इसके प्रमुख उदाहरण है।।

उत्तर प्रदेश में स्वर्णो को अपना अस्तित्व बचाना है तो 2017 विधानसभा चुनाव अंतिम मौका है,इन सपा बसपा जैसे जातिवादी और क्षत्रिय हिन्दू विरोधी दलों से मुक्ति पाने का

इस बार भी चूक गए तो चिरस्थाई गुलामी का जीवन जीने को विवश होना पड़ेगा,
बीजेपी में लाख बुराई हो, वो क्षत्रिय हित, स्वर्ण हित के मुद्दों पर खुलकर नही बोलते पर सपा बसपा कांग्रेस की बजाय यूपी में बीजेपी ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

7--बिहार,झारखण्ड-----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--आरजेडी, जेडीयू ,नवसामन्तवाद, नक्सलवाद ,भूमिहारो का जातिवाद

बिहार में भी पिछले 25 साल से आरजेडी जेडीयू के शासनकाल में अहीरों और कुर्मियो का शासन स्थापित हो गया है, क्षत्रिय और बाकि स्वर्ण हाशिए पर हैं।
गत विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपनी लचर रणनीति से चूक गयी पर सही रणनीति बनाए तो अगली बार जीत सम्भव है।

बिहार में भी यूपी की तरह ही बीजेपी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

8--मध्य प्रदेश---
क्षत्रिय हित में---कांग्रेस
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी---ब्राह्मणवाद

मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार से पहले क्षत्रियों की दमदार उपस्थिति थी जो पिछले डेढ़ दशक के बीजेपी शासन में कमजोर हुई है।हालाँकि कांग्रेस सरकार में जो राजपूत मुख्यमंत्री बने वो क्षेत्रीय आधार पर ही जातिवाद करते थे,बाकि क्षेत्रों के राजपूतो की वो उपेक्षा करते थे,
जैसे दिग्विजय सिंह चम्बल बुन्देलखण्ड और बघेलखण्ड के राजपूतो की उपेक्षा करते थे
वहीँ अर्जुन सिंह चम्बल और बुन्देलखण्ड और मालवा के राजपूतो की उपेक्षा करते थे।।

व्यापम घोटाले के कारण ओबीसी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गद्दी जाने पर नरेंद्र सिंह तोमर और नन्दकुमार सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हों सकते हैं।।
कांग्रेस से भी कोई राजपूत मुख्यमंत्री उम्मीदवार आ सकता है।।

यहाँ विकास के मामले में बीजेपी कांग्रेस पर भारी है पर कांग्रेस को आजमाने में भी कोई हर्ज नही है।

9--छत्तीसगढ़----
क्षत्रिय हित में---बीजेपी
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--आदिवासी वाद

10--गुजरात---
क्षत्रिय हित में---कांग्रेस
प्रदेश हित में---बीजेपी
क्षत्रियों विरोधी--मोदी जी ,क्योंकि उन्होंने गुजरात के एक भी राजपूत को न लोकसभा न राज्यसभा में भेजा।।

गुजरात में लम्बे समय बाद पटेल दलितों और मुसलमानो की एकजुटता से बीजेपी सरकार के जाने के आसार साफ़ दिख रहे हैं,राजपूतो की बीजेपी और मोदी ने पूर्ण उपेक्षा की है अत: यहाँ राजपूतो के लिए बीजेपी जीते या हारे कोई फर्क नही पड़ता।।

11--राजस्थान---
क्षत्रिय हित में---अब कोई नही (पहले बीजेपी थी)
प्रदेश हित में---कांग्रेस
क्षत्रियों विरोधी---जाटवाद (अब दोनों प्रमुख दलों में बुरी तरह हावी)

राजस्थान में राजपूतो ने ही बीजेपी को पाल पोसकर बड़ा किया और अपने खून से इसकी जड़ों को सींचा है लेकिन आज अहंकारी वसुंधरा कदम कदम पर राजपूतो की उपेक्षा और उत्पीड़न पर उतर आई है और जाटों का खुलकर पक्ष ले रही है,

आरक्षण पर कभी जाटों कभी गूजरों से वायदा करके इसने राज्य में कई बार आरक्षण की आग लगवाई,और भाईचारा खत्म किया।।कांग्रेस सरकार राजस्थान में बीजेपी से बेहतर रही है।
जनमानस भी इस बार वसुंधरा के खिलाफ है,
लेकिन दिक्कत यह है कि राजस्थान कांग्रेस पार्टी में जाटों का जबरदस्त वर्चस्व है, हमेशा जाटों को कांग्रेस में राजपूतो से 2 से 3 गुना प्रतिनिधित्व मिलता है,

कांग्रेस में राजपूतों को ठीकठाक प्रतिनिधित्व मिले तो अगली बार एकतरफा कांग्रेस को समर्थन देकर वसुंधरा का अहंकार चूर करके बीजेपी के समक्ष राजपूतो की ताकत का प्रदर्शन किया जा सकता है,जिसका दूरगामी लाभ राजपूत समाज को अवश्य होगा।किन्तु ऐसा न हो कि वसुंधरा की हार और कांग्रेस की जीत का श्रेय राजपूतो की बजाय जाट गूजर मीणाओं को मिले और राजपूत फिर उपेक्षा का शिकार हों।

12--महाराष्ट्र/कर्नाटक/उड़ीसा व् दक्षिण पूर्वी भारत---
महाराष्ट्र में खानदेश क्षेत्र और मुम्बई व् कई इलाको में राजपूत आबादी है,5 विधायक राजपूत हैं हाल ही में जयकुमार रावल को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।।
कर्नाटक में कांग्रेस से राजपूत मुख्यमंत्री धर्मसिंह रह चुके हैं ,बीजेपी के आनन्द सिंह भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।।
उड़ीसा में कई क्षत्रिय राजपरिवार राजनीती में हैं सुदूर दक्षिण भारत में भी राजपूत हैं।
इन सभी जगह प्रादेशिक और क्षेत्रीय स्तर पर समर्थन का निर्णय लिया जा सकता है।

अक्सर राजपूत समाज में चर्चा होती है कि कोई भी दल राजपूत हितैषी नही है, ये बिलकुल सच है,
हितैषी बनाने के लिए पहले हमे अपनी ताकत दिखानी पड़ेगी और ताकत आएगी एकजुटता से।
एकजुट होकर किसी भी दल को हरा या जिताकर नही दिखाएंगे तब तक कोई पूछ नही होगी।

ऐसे नही कि सपा अहिरो को सरकारी नोकरिया दें, राजपूत युवा बेरोजगार घुमे,फूलन देवी को टिकट दे और साथ में कुछ राजपूत क्षत्रपो को भी टिकट दे तो हम भूलकर सपा के राजपूत उम्मीदवार को जीता दें,
या बसपा तिलक तराजू तलवार का नारा दे, राजा भैया स्वाति सिंह का उत्पीड़न करे,और एक टिकट ठाकुर जयवीर सिंह को दे दें तो जयवीर सिंह को जिता दो!!!!

जो क्षत्रिय विरोधी दल हैं उन्हें उनके राजपूत क्षत्रपों के बावजूद धूल में नही मिलाएंगे तो ये हमारी कमजोरी समझकर हमारा विरोध और उत्पीड़न जारी रखेंगे।।

अभी हमारे सामने राष्ट्रीय स्तर पर दो विकल्प है।
1--बीजेपी जो न खुलकर राजपूतो के साथ है न स्वर्णो के,
पर राष्ट्रहित में है और मुस्लिम तुष्टिकरण नही करती,आतंकवादियो पर कठोर है, राजपूतों को सबसे ज्यादा टिकट और पद भी बीजेपी ही देती है।।
भ्र्ष्टाचार परिवारवाद में पीछे है।
2---कांग्रेस सपा बसपा आरजेडी जेडीयू आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियां जो राजपूतो ,स्वर्णो की कट्टर दुश्मन हैं, वोटबैंक के लिए आतंकवादियो के तुष्टिकरण से भी बाज नही आते,
दलित एक्ट, आरक्षण, मुस्लिम पर्सनल ला सब इन्ही की देन हैं और राष्ट्रिय सुरक्षा के मुद्दों पर भी राजनीति से बाज नही आते।।
भृष्टाचार और घोटालों में इन्होंने सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं,

राजपूतो को इनमे से एक चुनना है।।

राजपूत समाज जब तक एकजुट होकर किसी भी दल विशेष को किसी भी राज्य में हराने या जिताने की क्षमता विकसित नही करेगा,
तब तक हमे वो सम्मान नही मिलेगा जो राजस्थान हरियाणा में जाट को, गुजरात में पटेल को, महाराष्ट्र में मराठा को, यूपी में अहीर मुस्लिम दलित और ब्राह्मण को,और बिहार में अहीर कुर्मी को मिलता है कर्नाटक में वोक्कालिंग और लिंगायत समाज को मिलता है।।

हमे अपना सबसे बड़ा शत्रु पहचानकर उसे नेस्तनाबूद कर देना चाहिए, फिर जो हमारा होकर भी हमारे हितों की अनदेखी करे उसको सबक सिखाना चाहिए,
कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्तर पर अभी बीजेपी और मोदी जी का कोई विकल्प नही है पर प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय मुद्दों और गुणदोष के आधार पर निर्णय लिए जाने में हर्ज नही है।

हर राज्य में कौन सा राजनैतिक दल क्षत्रियो का हितैषी है इस पर मैंने अपने विचार इस लेख में दिए हैं,कृपया ब्लॉग लिंक खोलकर पढ़ें और अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर अंकित करें।।

Friday, October 7, 2016

साठा-चौरासी के राजपूतों की ताकत के आगे झुकी अखिलेश सरकार,शहीद रविन शिशौदियाका अंतिम संस्कार हुआ


साठा-चौरासी की के आगे झुकी अखिलेश सरकार------

बिसहाडा-दादरी में शहीद रवि शिशोदिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में क्षत्रियों के दबाव के आगे झुकी यूपी सरकार----
कई मांगो पर सहमति के बाद भाई रविन शिशौदिया का दाह संस्कार कर दिया गया।।
समझोते में क्षत्रिय संगठन और बीजेपी नेता ठाकुर संगीत सोम,केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा और कई हिन्दू संगठन व् साठा चौरासी के राजपूत शामिल हुए,

निम्न मांगो पर प्रदेश सरकार ने सहमति दी।
1--इस मामले की सीबीआई जांच करवाई जाएगी।
2--प्रदेश सरकार ने मुवावजा राशि दस लाख से बढ़ाकर 20 लाख की, जबकि परिवार को 05 लाख रूपये की सहायता की घोषणा ठाकुर संगीत सोम ने अपनी ओर से की।।
3--मृतक भाई रविन की पत्नी को नोकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया।
4--जेलर को हटाया गया ,प्रशासन से दस दिन में मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गयी, जाँच में जेलर के दोषी पाए जाने पर तुरन्त निलम्बन का आश्वासन दिया गया।।
5--गौहत्या के आरोपी जान मौहम्मद की जांच में दोषी पाए जाने पर गिरफ्तारी की बात प्रदेश सरकार ने कही,
6--मृतक शहीद रविन की संतान का पूरा खर्च जिलाधिकारी महोदय ने उठाने की बात रखी।

हालाँकि कई मांगे पूर्णतया पूरी नही हुई जिससे क्षत्रियो में भारी रोष है, अभी भी क्षत्रिय जान मौहम्मद की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। यूपी की क्षत्रिय स्वर्ण हिन्दू विरोधी समाजवादी पार्टी से इससे अधिक आशा भी नही की जा सकती है,क्योंकि उनकी प्राथमिकता बस मुस्लिम और अहीर है, राजपूत और बाकि हिन्दुओ से इन्हें कोई लेना देना नही है।
साथ ही मृतक का दाह संस्कार भी अधिक दिनों तक रोकना सम्भव नही था,

फिर भी कई मांगो पर प्रदेश की क्षत्रिय स्वर्ण हिन्दू विरोधी सरकार को झुकाकर एक नया इतिहास रचा गया है और साठा चौरासी के राजपूत भाई इसके लिए बधाई के पात्र हैं।।

अब इस आक्रोश को बनाए रखने की जरूरत है,जब भी चुनाव आएं सपा बसपा जैसी जातिवादी पार्टियों को धराशाई करना ही हर क्षत्रिय स्वर्ण और हिन्दू के लिए उचित रहेगा।।

अमर शहीद रविन राणा शिशौदिया को शत शत नमन
जय भवानी।।

Wednesday, October 5, 2016

क्या हिंदुत्व की रक्षा के लिए शहीद हुए इस गरीब राजपूत युवा को क्षत्रिय और हिन्दू संगठन न्याय दिलाएंगे??

हिन्दुत्व और गौरक्षा के लिया शहीद हुऐ भाई रवि राणा (रविन राणा) का पार्थिव शरीर बिसहाडा गावँ पहुँचा 😢😢

क्या आप जानते हो, बिसहाडा के इन गरीब और निर्दोष राजपूत भाइयों की कोई मदद पिछले एक साल से न तो किसी राजपूत संगठन ने की है, न किसी क्षत्रिय नेता ने,न ही बीजेपी ने और न ही किसी हिन्दू संगठन ने......

इनकी मदद किसी ने की तो वो की एक मुस्लिम से हिन्दू बने सोशल मिडिया एक्टिविस्ट भाई तुफैल चतुर्वेदी ने,जिन्होंने सोशल मिडिया पर मदद की अपील करके कई लाख रुपया इक्कठा करके इन राजपूत परिवारो को क़ानूनी लड़ाई लड़ने को दिया है!!!
उनके खाते में यथासम्भव क्षमता के अनुसार सहयोग हमने भी किया है, आगे भी जरूर करूँगा।।।
हिंदुत्व की राजनीती करने वाले राजनैतिक दल/संगठन विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, तोगड़िया,आरएसएस, कहाँ हैं???

क्षत्रियों के नेतृत्व का दावा करने वाली दर्जनों अलग अलग बनी हुई क्षत्रिय महासभाएं कहाँ हैं????
हरवंश सिंह जी की क्षत्रिय महासभा??
संजय सिंह (अमेठी) की क्षत्रिय महासभा??
दिग्विजय सिंह वांकानेर की क्षत्रिय महासभा??
कुंवर अजय सिंह की क्षत्रिय महासभा??
महेंद्र सिंह तंवर की क्षत्रिय महासभा??
जय राजपुताना/करणी सेना/राजपूत सभाएं कहाँ हैं आज???

कहाँ हैं सोशल मिडिया पर इन संगठनो और उनके नेताओं का प्रचार करते हुए महारथी??

अख़लाक़ की मौत को मानवता की हत्या बताने वाला तथाकथित राजपूत हितैषी पत्रकार श्रीपाल शक्तावत कहाँ है??
क्या इस गरीब राजपूत की यूँ तड़पा-तड़पा कर मौत उसकी नजर में मानवता की हत्या नही है??

कहाँ गया अवार्ड वापसी गैंग??
मोमबत्ती गैंग??आदर्श लिबरल गैंग??
कहाँ गया भांड मिडिया???

कहाँ हैं दियाकुमारी और उसकी निजी संपत्ति के विवाद को राजपूत समाज की लड़ाई बताने वाले उसके चमचे???
क्या इस गरीब राजपूत की लड़ाई लड़ने दिया कुमारी आएगी??

कहाँ हैं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ,राजा भैया जैसे राजनेता और सोशल मिडिया पर प्रचारित क्षत्रिय बाहुबली????

क्या गौमाता/हिंदुत्व और राजपूताने की शान बचाने के लिए शहीद हुए अपने गरीब और शूरवीर राजपूत भाई को न्याय नही दिलवाओगे??

Tuesday, October 4, 2016

मोदीभक्त मूर्ख हो सकते हैं पर आपियों और कांगियो की तरह गद्दार नही हो सकते

सोशल मिडिया पर मेरा व्यक्तिगत अनुभव विभिन्न दलो के समर्थकों की मनोदशा पर----

1---मोदीभक्त या अंधभक्त------

सोशल मिडिया पर मोदीभक्त अनाप शनाप कॉपी पेस्ट, फोटोशॉप डालकर अपने नेता की झूठी वाहवाही कर सकता है और दूसरे नेता का चीरहरण भी कर सकता है,
सिर्फ खम्भे गाड़ने पर जय हो जय हो का गायन शुरू कर देता है,पीतल को सोना और गीदड़ को शेर बताकर प्रचारित कर देता है,

पर 60% मोदी भक्त ऐसे हैं जो सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस रखते हैं, और उम्मीद पूरी न होने पर मोदी सरकार और बीजेपी की नीतियों की धज्जियां उड़ाने में कभी संकोच नही करते।।

कुल मिलाकर मोदीभक्त मुर्ख ,फेकू, मन्दबुद्धि, गपोड़ी ,ढपोरशँख, अंधभक्त हो या तुचिये तो हो सकते हैं

पर कोई मोदीभक्त कभी देशद्रोही नही हो सकता,देश उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होता है क्योंकि भक्त मूलत: राष्ट्रभक्त ही होते हैं।।

2---आपिये और कांगिये----
मोदिभक्तों और आपियों में सबसे बड़ा फर्क ये है कि मोदी भक्तों में कुछ अंधभक्तों को छोड़कर अधिकांश मोदी सरकार या बीजेपी की खिंचाई करने से नही चूकते,
सोशल मिडिया पर मोदी की खिंचाई की शुरुवात ही भक्तों ने की क्योंकि वो सही को सही और गलत को गलत लिखने का साहस रखते हैं,

लेकिन मैंने आज तक किसी आपिये को केजरीवाल या आम आदमी पार्टी की आलोचना करते नही देखा,जब भी कोई ऐसा मुद्दा आता है तो इनकी जबान सिल जाती है या ये कुतर्क करने लगते हैं,
मेरी मित्रता सूचि में भी कई आपिये हैं,
कुछ ओपन और कुछ चोरी छिपे,
जिन्हें आपिया कहलाने में शर्म आती है, वो आपियो के स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं,

ये आपिये ,कांगिये कभी अपने दुष्ट गद्दार नेताओं या उनकी नीतियों कारगुजारियों की आलोचना नही करते,
पर कोई देशभक्त बीजेपी समर्थक बीजेपी की किसी मुद्दे पर आलोचना करता है तो इनकी बांछे खिल जाती है,
इनका खून कई सौ एमएल बढ़ जाता है।
ये सोचते हैं कि अच्छा है मोदी अपने भक्तो में बदनाम होगा तो भक्त इनके धुरतेश्वर की शरण में आ जाएंगे,

केजरीवाल और दिग्विजय सिंह जैसे धूर्त बाटला हाउस एनकाउंटर में इंस्पेक्टर शर्मा की शहादत पर सवाल खड़े करते हैं,कश्मीर में आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग का समर्थन करते हैं ,देशद्रोही कन्हैया का समर्थन करते हैं,
पर किसी आपिये कांगिये ने कभी इनके शर्मनाक बयानों की आलोचना नही की।।

और अब इन दुष्टो ने भारतीय सेना की एलओसी पार कार्यवाही पर भी सवालिया निशान लगाकर पाकिस्तान की मदद की है,पर कोई भी गैरतमंद आपिया अभी तक केजरीवाल के देशद्रोही बयान की भर्त्सना करने सामने नही आया है।।।

वहीँ आपिये और कांगिये अपने नेताओ के देशद्रोही कृत्यों पर भी चुप्पी साधकर साबित कर रहे हैं कि ये न सिर्फ मुर्ख हैं, बल्कि धूर्त, गद्दार, और पेड़ वर्कर हैं।।

कुल मिलाकर मोदीभक्त मुर्ख हो सकते हैं अंधभक्त हो सकते हैं पर आपियो और कांगियो की तरह गद्दार नही हो सकते।।

Monday, October 3, 2016

इस बार भी बम्पर मतों से जीतेंगे हिन्दू हृदय सम्राट संगीत सोम

आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फायरब्रांड नेता ठाकुर संगीत सोम को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है,
सरधना विधानसभा सीट पर पहले ही घोषित सपा उम्मीदवार अतुल प्रधान मुकाबले से बाहर थे,
मुख्य मुकाबला संगीत सोम और बसपा के विवादित कट्टरपंथी नेता हाजी याकूब कुरैशी के पुत्र इमरान कुरैशी के बीच ही था,पर मुस्लिम मतो में अतुल प्रधान की सेंधमारी से संगीत सोम भारी मतों से जीतते नजर आ रहे थे।।

अतुल प्रधान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी युवा नेता है और आज सपा के प्रदेश अध्यक्ष और अखिलेश के चचा शिवपाल यादव ने अतुल प्रधान समेत अखिलेश के कई करीबियों के टिकट काट दिए हैं,

अतुल प्रधान (गुर्जर) का टिकट काटकर पिंटू राणा को दिया गया है जो राजपूत समाज से है,सपा जानती है कि वो इस सीट पर मुकाबले से बिलकुल बाहर है पर हर हाल में उसका लक्ष्य संगीत सोम को विधानसभा पहुंचने से रोकना है,भले ही बसपा यहाँ जीत जाए,
इसीलिए अतुल प्रधान का टिकट काटकर पिंटू राणा को राजपूत वोट काटने के लिये खड़ा किया गया है।।

इस परिवर्तन से जहाँ पिंटू राणा करीब 5 हजार अधिकतम राजपूत वोट काट सकते हैं जो संगीत सोम से नाराज होने के कारण अतुल प्रधान को भी मिलते,
लेकिन अतुल प्रधान का टिकट कटने से संगीत सोम को गुर्जरो के कम से कम 15 हजार अतिरिक्त वोट मिलेंगे जो पहले अतुल प्रधान को मिलने थे,
इसका प्रमुख कारण यह भी है कि कुछ दिनों पहले प्रधान के समाज की एक लड़की को गैर सम्प्रदाय के युवक द्वारा ले जाने के मुद्दे पर संगीत सोम ने उनका डटकर साथ दिया था जबकि अतुल ने चुप्पी साध ली थी,संगीत सोम की कड़ी चेतावनी से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और वो हिन्दू बेटी अपने घर आ गयी।।

इस स्थिति में अतिरिक्त गूजर वोट संगीत सोम को मिलेंगे जो निर्णायक सिद्ध हो सकते हैं,

लेकिन अतुल प्रधान को मिलने वाले अधिकतम 15-20 हजार मुस्लिम वोट भी अब बसपा के कुरैशी को मिलेंगे जिससे सरधना विधानसभा में बीजेपी और बसपा में सीधा जोरदार मुकाबला होने की सम्भावना है,

लेकिन इतना तय है कि ध्रुवीकरण में इस बार भी ठाकुर संगीत सिंह सोम जबरदस्त जीत हासिल करके अपने सभी राजनैतिक विरोधियो को करारी मात देने में सफल होंगे क्योंकि जनसम्पर्क और समर्थकों के लिए जान लड़ा देने का जो जज्बा संगीत सोम में हैं वो पुरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी और नेता में नही है।

अतुल प्रधान के लिए भी यह टिकट कटना एक बड़ा सबक है,उन्होंने पुरे 5 साल तक संगीत सोम की राह में कांटे बिछाने का प्रयास किया,कई झूठे मामलो में सत्ता का सहारा लेकर सोम और उनके परिवार को फंसाने की पूरी कोशिस की,लेकिन उसे कभी कामयाबी नही मिली,
उसने राजपूतो में भी कुछ स्वार्थी तत्वों का सहारा लेकर सेंधमारी का प्रयास किया पर सफलता नही मिली,
उल्टा संगीत सोम ने गुर्जर समाज के बन्धुओं की लड़ाई लड़कर उनके दिलों में अपनी जगह बना ली,संगीत सोम की छवि देश भर में हिन्दू हृदय सम्राट की है वहीं अतुल प्रधान 5 साल सपा की सरकार और अखिलेश से नजदीकी का लाभ उठाकर भी अपने समाज तक का दिल नही जीत पाए।

अतुल प्रधान को अगर लम्बी राजनीती करनी है तो उसे संगीत सोम के संघर्ष और जूनून से बहुत कुछ सीखना पड़ेगा।

Tuesday, September 27, 2016

कथित रजवाड़ों की चकाचौंध में मंत्रमुग्ध राजपूत समाज !!!


कथित रजवाड़ों की चकाचौंध में मंत्रमुग्ध राजपूत समाज------

मैं पहले से कह रहा हूँ कि ये कथित राजा महाराजा खुद को राजपूत नही समझते,बल्कि सिर्फ राजा के पूत ही समझते हैं😢😢

ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में इन कथित रजवाड़ों में भारतीय पाश्चात्य सभ्यता के घालमेल से भोगविलास की कुछ नई परम्पराएं और रीति रिवाज शुरू हुए,इस रँगीली तड़क भड़क ,वेशभूषा को ही कुछ बन्धु आज rajputana culture मानते हैं,जो कुछ संभ्रांत राजपूत रजवाड़ों और उनके दरबारी चमचो में ही प्रचलित है,
जबकि आम राजपूत की संस्कृति ,वेशभूषा बोलचाल इससे बिलकुल अलग है,पर उसे राजपुताना कल्चर नही माना जाता।

कुछेक अपवाद छोड़ दें तो इन रजवाड़ों ने कभी आम राजपूत की सुध नही ली लेकिन जब भी इनपर आंच आई तो गरीब राजपूत इनके मान सम्मान के लिए डटकर लड़ता आया है।

कुछ भाइयों को मेरी रजवाड़ा विरोधी बातें बहुत चुभती है,वो इन रजवाड़ों की गाड़ियों,वेशभूषा,हाथी घोड़ों महलों की फोटो सोशल मिडिया पर डालकर खुश हो लेते हैं उनकी समृद्धि को राजपूत समाज की समृद्धि मान लिया जाता है,जबकि इन्हें राजपूतो के मानसम्मान ,मान मर्यादा,क्षत्रिय संस्कृति,क्षत्रिय हितों की कोई फ़िक्र ही नही है,
इनकी आलोचना करने से कुछ भाई ब्लॉक करके भाग गए,पर इससे सच्चाई को झुठलाना सम्भव नही है,
ये एक और ताजा उदाहरण है,

जम्मू कश्मीर के महाराजा कर्णसिंह की पौत्री का विवाह पटियाला के जट्ट सिक्ख महाराजा अमरिंदर सिंह के नवासे सन्धु जाट से तय हुआ है,

कुछ दिन पहले ही हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सींग ने भी अपनी बेटी का ब्याह पटियाला के अमरिंदर जाट के परिवार में कर दिया,
रजवाडो की चकाचोंध में अंधे कुछ मूर्खों ने तर्क दिया कि पटियाला राजपरिवार भाटी राजपूतो की औलाद है इसलिए उनसे ब्याह जायज है,
अरे मूर्खो ये अमरिंदर सिंह जाट महासभा का राष्ट्रिय अध्यक्ष है और संसद में इसने खुलेआम जनरल वी के सिंह का विरोध और अपने स्वजातीय जनरल दलबीर सुहाग का समर्थन किया था!!

फिर तो बहुत सी छोटी जातियां भी राजपूतो से निकली है,
क्या सबमे ब्याह शुरू करवा दें??

भरतपुर धौलपुर पटियाला नाभा जींद फरीदकोट कुचेसर ऊंचागांव साहनपुर जैसी कुछ जाट जट्ट सिक्ख रियासते हैं जो आपस में ब्याह करते हैं
कपूरथला के अहलूवालिया कलाल परिवार और सिंधिया गायकवाड़ होल्कर वोडेयार आदि में भी इनकी रिश्तेदारियां होती है,
क्योंकि ये जातियां वर्ण रक्त की शुद्धता में विश्वास नही करती,

पर राजपूत समुदाय जिसने हजारो वर्षों में करोड़ो परिवारों को वर्णसंकरता फैलाने और अशुद्ध हों जाने से अपने से दूर कर दिया ,उसका संभ्रांत वर्ग आज क्यों मतिभृष्ट होकर गैर समाज में बेटी ब्यवहार कर रहा है???

हाल ही में क्षत्रिय समाज के कुछ बेशर्म लोगों के सहयोग से यूपी के अहीर राजपरिवार (मुलायम) में भी तीन बहुए राजपूत परिवारो से आ गयी!!!
और वो बेशर्म इसे अहीर राजपरिवार की महानता बता रहा है,

जबकि सच्चाई यह है कि राजपूतों को अपमानित करने,उन्हें अपना गुलाम बनाने और उनका मनोबल आत्मसम्मान चूर चूर करने के लिए मुगलो की निति पर चलकर ये रिश्ते किये गए है।

भरतपुर के जाट परिवार में कई बहुए राजपूत राजपरिवार/जागीरदार परिवारो से आई हैं पर उन्होंने एक भी बेटी किसी भी राजपूत राजपरिवार को नही दी है चाहो तो चेक कर लो!!!

इसका मतलब तो समझते हो न???

Monday, September 26, 2016

ईमानदार,निर्भीक और स्पष्टवादी आईएएस अधिकारी उदय प्रताप सिंह बने डीडीए के नए उपाध्यक्ष


आईएएस उदय प्रताप सिंह बने दिल्ली विकास प्राधिकरण के नए उपाध्यक्ष---

झारखण्ड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उदय प्रताप सिंह जी को दिल्ली विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है,
श्री उदय प्रताप सिंह 1984 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं,

ईमानदार और निर्भीक प्रशासनिक अधिकारी---

ये झारखण्ड से केंद्रीय प्रतिनियुकि पर चले गए थे किन्तु झारखण्ड में बीजेपी सरकार आते ही इन्हें मुख्यमंत्री रघुवर दयाल वर्मा ने वापस बुला लिया और चीफ सेक्रेटरी रैंक दे दी,

शीघ्र ही इन्हें राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया जाना था,लेकिन उदय प्रताप जी ने सिद्धान्तों से कोई समझोता नही किया और खनन की गड़बड़ी का मामला उजागर कर दिया,झारखण्ड में खनन मंत्रालय मुख्यमंत्री के ही पास था,
इससे पूरी सरकार हिल गयी, और श्री उदय प्रताप सिंह जैसे ईमानदार अधिकारी को वापस केंद्र में भेज दिया गया,
जबकि वो खनन की गड़बड़ियों की पोल न खोलते तो जल्द ही झारखण्ड के मुख्य सचिव नियुक्त होने वाले थे।।

अब इनकी नियुक्ति दिल्ली विकास प्राधिकरण में हुई है और दिल्ली में आप जानते ही हैं कि स्वघोषित राजा हरिश्चंद्र केजरीवाल जी मुख्यमंत्री हैं जो हर समस्या का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हैं और दिल्ली की अव्यवस्था की जिम्मेदारी डीडीए और नगर निगमों पर डाल देते हैं,

पर सावधान केजरीवाल जी,आपका सामना एक निर्भीक और असली ईमानदार अधिकारी से होने जा रहा है इनपर आरोप लगाकर आप अपनी जिम्मेदारियो से नही बच पाओगे।।

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कई वरिष्ठ राजपूत अधिकारीयों की उच्च पदों पर नियुक्ति की है,
मोदी जी का आभार।