Monday, September 26, 2016

सैंकड़ो कांग्रेसियों ने लगाए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे!!!!!

हाल ही में मुरादाबाद में कांग्रेस पार्टी के रैली में सैंकड़ो कांग्रेसियो ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाकर अपने देशद्रोही होने का सबूत दिया है,सैंकड़ो कांग्रेसियो पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।

कांग्रेस पार्टी की रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगना कोई नई बात नही है

किसकी शह पर सैंकड़ो कांग्रेसियो ये खुलेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए और कांग्रेस ने क्या कार्यवाही उन गद्दारों के खिलाफ की,

इसका जवाब राहुल गांधी और कांग्रेस के कार्यकर्ता जरूर दें,

2007 में विधानसभा चुनाव के समय वेस्ट यूपी के एक चर्चित नेता के चुनाव प्रचार में नारा लगाया जाता था,
"ऊपर चचा खाजी,नीचे भतीजा इम्रान,यहीं मिलेगा पाकिस्तान"

ऊपर माने संसद में, और नीचे यानि विधानसभा में।।

इस नारे ने इतना जोश भर दिया कि भतीजा निर्दलीय ही विधायक का चुनाव जीत गया!!!

आज वो भतीजा भी खानग्रेस का बड़ा नेता है जो कभी बोटी बोटी काटने की बात करता है कभी राजपूतों के खिलाफ टिप्पणी करता है!!!

प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध है कि सीमा पार के पाकिस्तान से बाद में निपटना,
पहले देश के भीतर के गद्दारो के द्वारा आचार विचारों द्वारा बनाए गए पाकिस्तान से सख्ती से निपट लें,इनपर कड़ी कार्यवाही नही की गयी तो ये देश को भीतर से इतना खोखला कर देंगे कि देश बाहरी चुनोती का सामना नही कर पाएगा।

देशद्रोहियों को कांग्रेस का साथ इतना क्यों भांता है????
ये रिश्ता क्या कहलाता है???

Saturday, September 24, 2016

बिहार के दो जांबाज राजपूत ऑफिसर सम्भालेंगे पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था


जय भवानी,
केन्‍द्र सरकार ने हाल ही में भारत की सबसे मजबूत सुरक्षा यूनिट नेशनल सिक्‍यूरिटी गार्ड (एनएसजी) व केन्‍द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में नये डायरेक्‍टर जनरल की नियुक्ति की है । दोनों नये डीजी बिहार के प्रतिष्ठित राजपूत परिवारों से हैं

1--आईपीएस सुधीर प्रताप सिंह---एनएसजी के डीजी बने सुधीर प्रताप सिंह तो केन्‍द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी के अपने बड़े भाई हैं । नवनियुक्‍त एनएसजी डीजी सुधीर प्रताप सिंह मूल रुप से छपरा के रहने वाले हैं । सुधीर परिवार में केन्‍द्रीय मंत्री राजीव प्रताप सिंह के मंझले भाई हैं । 
ये तीन भाई हैं,रणधीर प्रताप सिंह,सुधीर प्रताप सिंह और राजीव प्रताप रुडी । सबसे बड़े रणधीर इंडियन एयर फोर्स में थे,जिन्‍होंने स्‍वैच्छिक सेवानिवृति ले ली है।सुधीर के एनएसजी चीफ बनने में परिवार में खुशी है । वे 1983 बैच के राजस्‍थान काडर के आईपीएस अफसर हैं ।

2--आईपीएस श्री ओपी सिंह---सीआईएसएफ के डीजी बने ओपी सिंह का जन्‍म गया जिले में हुआ । वे भी 1983 में आईपीएस बने ।ये यूपी काडर के आईएएस हैं । 
ओपी सिंह जी जस्टिस केबीएन सिंह के दामाद और जस्टिस समरेन्‍द्र प्रताप सिंह के बहनोई हैं।

नवनियुक्‍त दोनों आईपीएस अफसरों का सर्विस रिकार्ड बहुत ही शानदार रहा है । 

बिहार और पूर्वान्चल देश के दो ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ से सबसे ज्यादा राजपूत आईएएस और आईपीएस बनते हैं,
दोनों राजपूत अधिकारीयों को हार्दिक शुभकामनाएं 

अंतर्जातीय प्रेम विवाहों की समाज में बढ़ती घटनाएं,इसका निदान क्या हो?

अंतर्जातीय/गैरसम्प्रदाय में प्रेम विवाह की बढ़ती घटनाएं----

प्रेम विवाह ,अंतर्जातीय विवाह ,गैर सम्प्रदाय में विवाह की घटनाएं आजकल आम बात हो गयी है और कोई भी समाज इससे अछूता नही है,यहाँ तक कि क्षत्रिय समाज भी नही।।

आधुनिकता के नाम पर आजकल युवक युवतियों के स्वच्छन्द व्यवहार ,संस्कारो के आभाव,अभिभावको की लापरवाही/प्रोत्साहन से ऐसी घटनाएं खूब बढ़ती जा रही हैं,वर्णसंकरता फैलने से क्षत्रियत्व का हास हो रहा है।
अक्सर नौजवान माँ बाप की इज्जत चौराहे पर नीलाम कर उनकी जगहंसाई करवाने से जरा भी नही चूकते।।

किसी के परिवार/रिश्तेदारी में यह घटना कभी भी नही होगी यह नही कहा जा सकता!!
किन्तु ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना किसी के परिवार में हो जाए और उसमे उस परिवार का कोई योगदान न रहा हो तो इसके लिए किसी को शर्मिंदा करना या उसकी भर्त्सना करना अनुचित है।कई ऐसे माँ बाप भाई बहन जीवन भर तिरस्कार और अपमान झेलते हैं जिनके परिवार में कोई ऐसी घटना हुई हो जबकि उन्होंने इसे रोकने का पूरा प्रयास भी किया,
यह मेरी नजर में बिलकुल अनुचित है।।

परिवार में हुई ऐसी घटना होने के बाद ऑनरकिलिंग या हिंसा  भी सही नही कही जा सकती क्योंकि किसी एक की नालायकी से बाकि बचा पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है और मुकदमों/सजा से कैरियर बर्बाद होते हैं।।
मैंने ऐसे कई परिवार देखे हैं जो पहले ध्यान नही देते और बाद में विवाह होने के बाद हिंसा का सहारा लेते हैं और मुकदमेबाजी में फंसने के बाद सामने वाले परिवार से सजा से बचने के लिए मजबूरी में समझौता कर लेते हैं 😢😢
हो सकता है आपको मेरा यह कथन कायरता पूर्ण लगे,किन्तु व्यवहारिकता यही है जो लिखा है।

इसलिए अपनी संतान/अनुजो को ऐसी शिक्षा और संस्कार दें कि प्रेमविवाह जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं न हों ,
माँ बाप और बड़े भाई बहन खुद ऐसा आचरण रखें जिससे ऐसा घृणित कार्य करते हुए संतान दस बार सोचे,

गैर समाज में प्रेमविवाह से पूर्व हर सम्भव प्रयास करना चाहिए उसे रोकने का,
फिर भी कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए और हाथ से मामला निकल जाए तो बजाय क़ानूनी पचड़ों के उस नामुराद से परिवार और रिश्तेदारो को सम्बन्ध विच्छेद और बहिष्कार करना ही पर्याप्त है।।

किन्तु ऐसा घृणित कार्य करने के बाद इन अंतर्जातीय/अंतरधार्मिक/सगोत्र विवाह करने वाले जोड़ों से सम्बन्ध बनाए रखना,और उन्हें मान्यता देने का अर्थ यही है कि कहीं न कहीं इस शर्मनाक घटना में आपकी संलिप्प्ता अवश्य है और आपने स्वयं अपने चरित्र से परिवार में कोई अच्छा उदाहरण पेश नही किया और न ही अपनी संतान को संस्कार दिए हैं,
एक बार ऐसी घटनाओं के बाद भी सम्बन्ध बनाए रखे तो उस परिवार में और उनकी रिश्तेदारी में ऐसी कई और घटनाए एक के बाद एक होती हैं और उन्हें रोकने का फिर कोई नैतिक बल नही रह जाता।।

हाल ही में सोशल मिडिया पहलवान अजीत सिंह का मुद्दा सुर्ख़ियो में है,
जो शख्स दिन भर हिंदुत्व का जाप करके दूसरे सम्प्रदाय को गालियां देने में व्यस्त रहता है और हर मुद्दे पर मोदी सरकार का बेशर्मी से बचाव करता था,
उसके बारे में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि उसकी खुद की बहन ने उसी सम्प्रदाय के युवक से प्रेम विवाह किया है जिसको दिन भर ये पहलवान सोशल मिडिया पर गालियां देकर खुद को बड़ा हिंदुत्ववादी बनता है 🙊🙊🙊🙊

चलिए हो सकता है ये प्रेमविवाह इसके परिवार की मर्जी से न हुआ होगा तो इसकी भर्त्सना अनुचित है,
लेकिन यहाँ भी खुलासा हुआ है कि इसका परिवार अपनी उस बहन के गैर सम्प्रदाय वाले परिवार से पूरी तरह न सिर्फ जुड़ा है बल्कि उनसे सारे रिश्ते भी निभाता है,
अब ऐसे व्यक्ति का जो दिन भर सोशल मिडिया पर हिंदुत्व और मोदिभक्ति का पाठ पढ़ाए खुद के जीवन में कैसा आचरण करता है आप स्वयं देख लीजिये,

ऐसे धूर्त दुष्टों का अवश्य सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए,यह मेरी राय है जरूरी नही कि आप मुझसे सहमत हों।
आप अपनी राय से जरूर अवगत करायें।

जय श्रीराम 

Sunday, September 18, 2016

Saturday, September 17, 2016

हुमायूँ के विश्वासघात ने हजारो क्षत्राणियों को जौहर की अग्नि में जलने को विवश कर दिया, Humayun the traitor


चित्तौड़ की महारानी कर्मावती और हुमायूँ-राखी प्रकरण का सच क्या है??

वामपंथी/कांग्रेसी/सेक्युलर पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है कि मध्यकाल में चित्तौड़ की महारानी कर्मावती (कर्मवती अथवा कर्णावती) ने गुजरात के शासक बहादुरशाह के हमले के समय मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजी थी और बदले में हुमायूँ ने भाई का फर्ज निभाते हुए सेना के साथ जाकर रानी कर्मावती और चित्तौड़ की रक्षा की थी,

जबकि ये कोरा झूठ है,सच्चाई क्या है ये जानने के लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़ें और शेयर भी करें,

जब तक राणा सांगा जीवित थे तब तक उन्होंने मालवा गुजरात और दिल्ली के सुल्तानों को बार बार पराजित किया और किसी मुस्लिम शक्ति की मेवाड़ की ओर आँख उठाने की भी हिम्मत नही थी,लेकिन खानवा के युद्ध के बाद राणा सांगा की मृत्यु हो गयी,इस युद्ध से राजपूत शक्ति को गहरा आघात पहुंचा,और कोई योग्य शासक उस समय मेवाड़ में नही था,ऐसे में गुजरात के शासक बहादुरशाह ने 1535 ईस्वी में मेवाड़ से बदला चुकाने के लिए एक बड़ी सेना लेकर आक्रमण कर दिया,

इस विकट स्थिति में सहायता की कोई अन्य आशा न देखकर महारानी कर्मावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर उससे सहायता मांगी।

दरअसल हुमायूँ सेना लेकर चित्तौड़ की रक्षा के लिए चला जरूर था,लेकिन इसी बीच उसे गुजरात के शासक बहादुरशाह का पत्र मिला जिसने लिखा था कि वो मुसलमानो की तरफ से भारत के सबसे बड़े काफ़िर राज्य के खिलाफ जिहाद कर रहा है,
यह पत्र मिलते ही हुमायूँ भाई का फर्ज भूलकर ग्वालियर में ही रुक गया,और एक माह रुककर वापस चला गया!!!!

कथित राखी भाई से कोई मदद न मिलने पर महाराणा सांगा की पत्नी महारानी कर्मावती ने हजारो क्षत्रिय वीरांगनाओ के साथ मिलकर जौहर की चिता में जलकर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए,और राजपूत सैनिको ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए
लेकिन वो धूर्त हुमायूँ इस्लाम और जिहाद के सामने राखी का बन्धन भुला बैठा!!!
जबकि इस धूर्त को विपत्तिकाल में अमरकोट के राजपूत राजपरिवार ने शरण दी थी जहाँ अकबर का जन्म हुआ था।

ये गुजरात का बहादुरशाह भी धर्मपरिवर्तित राजपूतों का ही वंशज था,
इसके पूर्वज हरियाणा के थानेश्वर के नागवंशी टाक राजपूत थे,साहरण टाक ने सल्तनत काल में इस्लाम धर्म गृहण किया और इसे दिल्ली के सुल्तानों ने पहले राजपूताना और बाद में गुजरात का सूबेदार बनाया,
दिल्ली के सुल्तानों के कमजोर होते ही ये स्वतन्त्र हो गया,और मुजफ्फरशाह के नाम से गुजरात की गद्दी पर बैठा।
इसकी कई पीढ़ियों ने गुजरात में राज किया,जिनमे महमूद बेगड़ा और बहादुरशाह प्रमुख थे।
इस धर्मपरिवर्तित राजपूत वंश ने हिंदुओं/राजपूतों पर जुल्म ढाने में तुर्कों मुगलो पठानों को भी पीछे छोड़ दिया,
इस्लाम और जिहाद की भावना के आगे राजपूती रक्त का इनकी नजरो में कोई मान था ही नही।।

जब तक महाराणा कुम्भा और सांगा जैसे शूरवीर मेवाड़ में थे तब तक इन गुजरात और मालवा के सुल्तानों की ओकात नही थी कि वो मेवाड़ की तरफ आँख भी उठाकर देख सकें,
किन्तु खानवा के युद्ध के पश्चात् महाराणा सांगा की मृत्यु के बाद इन गीदड़ो को मेवाड़ से पुरानी दुश्मनी का हिसाब चुकता करने का मौका मिल गया।।।
सवतंत्रता प्राप्ति के बाद नेहरू के इशारे पर वामपंथी इतिहासकारो ने छदम हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए मुस्लिमो को महिमामण्डित करने हेतु यह झूठ फैलाया कि हुमायूँ ने हिन्दू रानी कर्मावती द्वारा भेजी गयी राखी की लाज रखते हुए मेवाड़ की मदद की थी,
जबकि सच यह है कि हुमायूँ के विश्वासघात की वजह से ही रानी कर्मावती और हजारो क्षत्राणियों को जौहर की अग्नि में भस्म होना पड़ा था।।

क्या केंद्र की मोदी सरकार देशभर के पाठ्यक्रमो में महारानी कर्मावती हुमायूँ राखी प्रकरण का सच बताने का साहस करेगी??????

Thursday, September 15, 2016

शहाबुद्दीन की रिहाई में केंद्र सरकार की लापरवाही भी जिम्मेदार??

शहाबुद्दीन की रिहाई में केंद्र सरकार की लापरवाही भी जिम्मेदार??
आज सारे देश में बिहार के दुर्दांत अपराधी/आरजेडी मौहम्मद शहाबुद्दीन की पटना हाईकोर्ट द्वारा जमानत पर रिहाई चर्चा का विषय बनी हुई है,सारे बिहार में आतंक की लहर दौड़ गयी है।

शाहबुद्दीन की रिहाई के लिए लालू प्रसाद और नितीश कुमार की सरकार के अलावा पटना हाईकोर्ट की भी कड़ी आलोचना देश भर में हो रही है।।

लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बाहुबली शहाबुद्दीन की रिहाई के लिए केंद्र सरकार की लापरवाही भी बराबर की जिम्मेदार है।

शहाबुद्दीन पर दर्जनों हत्याओं का आरोप है और वो लालू प्रसाद की आरजेडी का मुस्लिम चेहरा है ये सभी जानते हैं,बिहार में भले ही आरजेडी और जेडीयू मिलकर सरकार चला रहे हों लेकिन शहाबुद्दीन का बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से छत्तीस का आंकड़ा रहता है।।
जब से लालू प्रसाद के समर्थन से नितीश पुन बिहार के सीएम बने हैं तब से लालू के दम पर शहाबुद्दीन फिर से अपने रंग में आ गया है और हाल ही में एक पत्रकार राजदेव रंजन (अहीर) की हत्या में उसके गुर्गों की भूमिका पाई गयी है,

राजदेव रंजन की हत्या इसी साल 13 मई को हुई थी.
नितीश कुमार शहाबुद्दीन के विरुद्ध था इसलिए तीन दिन बाद ही राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी थी.
लेकिन केन्द्र सरकार कई महीने बीत जाने पर भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
मृतक पत्रकार राजदेव की पत्नी आशा रंजन पिछले दिनों से दिल्ली में रहकर सरकार से गुहार लगा रही थी.
लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी मांग अनसुनी कर दी,

केंद्र सरकार की ओर से निश्चिन्त होते ही लालू ने नितीश सरकार पर दबाव डालकर हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी कमजोर करवा दी जिससे मौहम्मद शहाबुद्दीन को जमानत मिल गयी!!!!!

अगर राजदेव रंजन हत्याकांड की सीबीआई जाँच की अनुशंसा केंद्र सरकार मान लेती तो शहाबुद्दीन की किसी भी दशा में रिहाई नही हो पाती!!

अब जाकर केंद्र सरकार नींद से जागी और 4 महीने बाद उसने इस हत्याकांड की सीबीआई जाँच की हरी झण्डी दी है।।

अब सवाल यह है कि एक दुर्दांत अपराधी जिसपर हिंदुत्ववादी कई बार पाकिस्तान से सम्बन्धो का आरोप लगाते रहे हैं उसके प्रति केंद्र सरकार की नरमी क्या संकेत देती है????

जो समझ में आता है वो ये है -----
इंदिरा गांधी ने कम कट्टर सिक्ख अकालियों को काटने के लिए घोर कट्टर जनरैल सिंह भिंडरावाले को बढ़ावा दिया था,जिसके परिणामस्वरूप पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा मिला और हजारो निर्दोष नागरिको सुरक्षा बलों की जान गयी,
इंदिरा गांधी को राजनितिक लाभ तो क्या मिलता उल्टा उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा!!!!

शेर/भेड़िये की सवारी कभी लाभ नही देती,
पर बीजेपी की केंद्र सरकार के रणनीतिकार सबक सीखने को तैयार नही हैं,
बीजेपी के समर्थको और रणनीतिकारों की सोच है कि ओवेसी बन्धुओ और उनकी घोर कट्टरवादी पार्टी एमआईएम को उत्तर भारत में बढ़ने दिया जाए जिससे मुस्लिम वोट बंट जाए और बीजेपी को लाभ मिले,

जबकि ओवेसी बन्धुओ की बिहार हो या दिल्ली कहीं भी सक्रियता का बीजेपी को कोई लाभ नही हुआ बल्कि मुस्लिमो को उसने बीजेपी के विरुद्ध रणनीतिक मतदान के लिए एकजुट कर दिया,

ओवेसी बन्धु जिस प्रकार देश में साम्प्रदायिक माहौल खराब कर रहे हैं उनके विरुद्ध केंद्र सरकारो को कड़ी क़ानूनी कार्यवाही करना चाहिए ,
पर बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि ओवेसी अपना प्रभाव उत्तर भारतीय राज्यो में भी बढ़ाए!!!

ये आत्मघाती रणनीति पंजाब की तरह ही विनाशक सिद्ध होगी ये तय है इससे बीजेपी को कभी लाभ नही मिलेगा बल्कि ओवेसी के दम पर मुस्लिम और कट्टरता की ओर बढ़ेंगे जिससे उत्तर भारत में अगले दशक में भारी उथल पुथल हो सकती है।।

मोदी सरकार ने इंदिरा गांधी सरकार से सबक नही लिया और कई भिंडरावाला बनाने की तैयारी है,

शहाबुद्दीन के विरुद्ध सीबीआई जाँच की संस्तुति पर 4 महीने तक केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही,क्या ये इसी रणनीति का हिस्सा था???

Tuesday, September 13, 2016

मोदीभक्तों द्वारा ईमानदार और सिद्धान्तवादी जस्टिस टीएस ठाकुर का चरित्रहनन क्या उचित?


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री तीर्थ सिंह ठाकुर चर्चाओं में रहे हैं,
उन्होंने स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर प्रधानमन्त्री मोदी जी को उच्च अदालतों में जजों की संख्या पूरी न किये जाने पर आगाह किया था,
तब से जस्टिस ठाकुर धूर्त मोदिभक्तों के निशाने पर आ गए हैं,सोशल मिडिया पर मोदीभक्त जस्टिस ठाकुर पर तरह तरह के आरोप लगाकर उनका चरित्रहनन कर रहे हैं,
यह कोई नई बात नही है मोदीभक्त पहले से ऐसी धूर्तता,मूर्खता और अंधभक्ति के लिए कुख्यात रहे हैं ।

मोदीभक्त सोशल मिडिया पर जस्टिस ठाकुर पर दो आरोप लगा रहे हैं,
आरोप संख्या 1--
जस्टिस ठाकुर का परिवार कांग्रेसी रहा है और वो कांग्रेस की कृपा से ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं!!!!

इसका जवाब---
उनके पिता श्री देवीदास ठाकुर भी न्यायविद थे,जम्मू कश्मीर एक अशांत क्षेत्र रहा है,जब जम्मू कश्मीर में गुलाम मौहम्मद शाह की सरकार बनी तो भारत सरकार के परामर्श से विधिक मामलो की देखरेख के लिए वो न्यायिक सेवा छोड़कर जम्मू कश्मीर मन्त्रीमण्डल में शामिल हुए थे,राजनीति उनका पेशा नही था बल्कि राष्ट्रहित और राज्य की विकट स्थिति पर नजर रखने को वो राज्य सरकार में शामिल हुए थे,
यूँ तो अटल बिहारी वाजपेयी भी नेहरू के प्रशंसक थे,डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी नेहरू सरकार में मंत्री बने थे,क्या वो भी कांग्रेस के चमचे हो गए?????👆👆

जब जस्टिस टीएस ठाकुर के पिता जम्मू कश्मीर राज्य सरकार में मंत्री थे तब वो जम्मू कश्मीर बार एशोसिएशन के अध्यक्ष थे,इस सरकार के कार्यो के विरुद्ध जब प्रदर्शन हो रहे थे तब
इन्ही टीएस ठाकुर ने अपने पिता की सरकार की बर्खास्तगी की भी मांग कर दी थी.

जस्टिस ठाकुर को लंबे समय से जानने वाले और वरिष्ठ वकील बीएस सलाथिया कहते हैं, "तीरथ सिंह ठाकुर हमेशा से सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने का माद्दा रखते थे".💪💪

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब वे अपने पिता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकते हैं तो आप समझ जाइए कि वो ग़लत होते हुए नहीं देख सकते हैं.
ऐसे सिद्धान्तवादी न्यायविद पर झूठे आरोप लगाने में मोदिभक्तो को लज्जा नही आती??🐴🐴

आरोप संख्या 2---
मोदिभक्तों का जस्टिस ठाकुर पर आरोप है कि वो अपने रिश्तेदारों को coliseum system के माध्यम से जज बनवाना चाहते थे जिसे मोदी सरकार ने अनसुना कर दिया,इसलिए वो मोदी से नाराज हैं,

इसका जवाब---
ये एकदम झूठा और बेबुनियाद आरोप है,जो संस्तुति स्वीकृति के लिए भेजी गयी है उसमे जस्टिस ठाकुर के किसी रिश्तेदार का दूर दूर तक कोई नाम नही है,
रही बात जजो की नियुक्ति से सम्बंधित coliseum system की,तो वो प्रणाली शुरू से देश में लागु है,क्या जस्टिस ठाकुर ने बनाई है जजो की नियुक्ति से सम्बंधित coliseum system प्रणाली ?????

आज ऊपरी और निचली अदालतों में जजो की कमी के कारण करोड़ो केस पैंडिंग पड़े हैं,आम जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ गया है,
मोदी सरकार भी इस मुद्दे पर हाथ पर हाथ धरे बैठी है,क्या इस मुद्दे पर सरकार को आगाह करना मोदिभक्तो की नजर में गुनाह हो गया???

और वो जिस पद पर आज हैं वहां वो भला कैसे चुप रह सकते हैं जब पूरे देश में जजों की इतनी कमी है.
अब जम्मू कश्मीर उच्च न्यायलय को देख लीजिए. यहाँ 17 स्वीकृत पद हैं मगर जजों की मौजूदा संख्या सिर्फ आठ है. तो वो भला कैसे नहीं बोलें??
उन्होंने कहा था कि अगर जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार कुछ नहीं करती है तो फिर न्यायपालिका को ही हस्तक्षेप करने पर मजबूर होना पड़ेगा.⛳⛳

तीर्थ सिंह ठाकुर अगर चीफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं तो अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर बने हैं, किसी खान्ग्रेसी,खाजपाई के रहमोकरम पर नही,
अगर कोई सोचता है कि अनर्गल मिथ्या प्रचार करके वो सिद्धान्तवादी जस्टिस ठाकुर साहब का मुँह बन्द कर देंगे तो उसकी भूल है।💪💪

आज हालत ये हो गयी कि कोई सही मुद्दे पर भी मोदी सरकार को चेताए या उसकी आलोचना करे तो धूर्त, मुर्ख और बेशर्म मोदीभक्त तुरन्त उसपर देशद्रोही,कांग्रेसी,आपिया,भृष्ट का लेबल चिपकाकर शोशल मिडिया पर चरित्रहनन शुरू कर देते हैं🐮🐮
क्या गलत कहा जस्टिस ठाकुर ने कि नारों और जुमलों से विकास नही होता??

अगर मोदी की अंधभक्ति ही तुम्हारा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है तो ईश्वर भारतवर्ष,और सनातन धर्म की रक्षा करे💐💐