Tuesday, September 27, 2016

कथित रजवाड़ों की चकाचौंध में मंत्रमुग्ध राजपूत समाज !!!


कथित रजवाड़ों की चकाचौंध में मंत्रमुग्ध राजपूत समाज------

मैं पहले से कह रहा हूँ कि ये कथित राजा महाराजा खुद को राजपूत नही समझते,बल्कि सिर्फ राजा के पूत ही समझते हैं😢😢

ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में इन कथित रजवाड़ों में भारतीय पाश्चात्य सभ्यता के घालमेल से भोगविलास की कुछ नई परम्पराएं और रीति रिवाज शुरू हुए,इस रँगीली तड़क भड़क ,वेशभूषा को ही कुछ बन्धु आज rajputana culture मानते हैं,जो कुछ संभ्रांत राजपूत रजवाड़ों और उनके दरबारी चमचो में ही प्रचलित है,
जबकि आम राजपूत की संस्कृति ,वेशभूषा बोलचाल इससे बिलकुल अलग है,पर उसे राजपुताना कल्चर नही माना जाता।

कुछेक अपवाद छोड़ दें तो इन रजवाड़ों ने कभी आम राजपूत की सुध नही ली लेकिन जब भी इनपर आंच आई तो गरीब राजपूत इनके मान सम्मान के लिए डटकर लड़ता आया है।

कुछ भाइयों को मेरी रजवाड़ा विरोधी बातें बहुत चुभती है,वो इन रजवाड़ों की गाड़ियों,वेशभूषा,हाथी घोड़ों महलों की फोटो सोशल मिडिया पर डालकर खुश हो लेते हैं उनकी समृद्धि को राजपूत समाज की समृद्धि मान लिया जाता है,जबकि इन्हें राजपूतो के मानसम्मान ,मान मर्यादा,क्षत्रिय संस्कृति,क्षत्रिय हितों की कोई फ़िक्र ही नही है,
इनकी आलोचना करने से कुछ भाई ब्लॉक करके भाग गए,पर इससे सच्चाई को झुठलाना सम्भव नही है,
ये एक और ताजा उदाहरण है,

जम्मू कश्मीर के महाराजा कर्णसिंह की पौत्री का विवाह पटियाला के जट्ट सिक्ख महाराजा अमरिंदर सिंह के नवासे सन्धु जाट से तय हुआ है,

कुछ दिन पहले ही हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सींग ने भी अपनी बेटी का ब्याह पटियाला के अमरिंदर जाट के परिवार में कर दिया,
रजवाडो की चकाचोंध में अंधे कुछ मूर्खों ने तर्क दिया कि पटियाला राजपरिवार भाटी राजपूतो की औलाद है इसलिए उनसे ब्याह जायज है,
अरे मूर्खो ये अमरिंदर सिंह जाट महासभा का राष्ट्रिय अध्यक्ष है और संसद में इसने खुलेआम जनरल वी के सिंह का विरोध और अपने स्वजातीय जनरल दलबीर सुहाग का समर्थन किया था!!

फिर तो बहुत सी छोटी जातियां भी राजपूतो से निकली है,
क्या सबमे ब्याह शुरू करवा दें??

भरतपुर धौलपुर पटियाला नाभा जींद फरीदकोट कुचेसर ऊंचागांव साहनपुर जैसी कुछ जाट जट्ट सिक्ख रियासते हैं जो आपस में ब्याह करते हैं
कपूरथला के अहलूवालिया कलाल परिवार और सिंधिया गायकवाड़ होल्कर वोडेयार आदि में भी इनकी रिश्तेदारियां होती है,
क्योंकि ये जातियां वर्ण रक्त की शुद्धता में विश्वास नही करती,

पर राजपूत समुदाय जिसने हजारो वर्षों में करोड़ो परिवारों को वर्णसंकरता फैलाने और अशुद्ध हों जाने से अपने से दूर कर दिया ,उसका संभ्रांत वर्ग आज क्यों मतिभृष्ट होकर गैर समाज में बेटी ब्यवहार कर रहा है???

हाल ही में क्षत्रिय समाज के कुछ बेशर्म लोगों के सहयोग से यूपी के अहीर राजपरिवार (मुलायम) में भी तीन बहुए राजपूत परिवारो से आ गयी!!!
और वो बेशर्म इसे अहीर राजपरिवार की महानता बता रहा है,

जबकि सच्चाई यह है कि राजपूतों को अपमानित करने,उन्हें अपना गुलाम बनाने और उनका मनोबल आत्मसम्मान चूर चूर करने के लिए मुगलो की निति पर चलकर ये रिश्ते किये गए है।

भरतपुर के जाट परिवार में कई बहुए राजपूत राजपरिवार/जागीरदार परिवारो से आई हैं पर उन्होंने एक भी बेटी किसी भी राजपूत राजपरिवार को नही दी है चाहो तो चेक कर लो!!!

इसका मतलब तो समझते हो न???

Monday, September 26, 2016

ईमानदार,निर्भीक और स्पष्टवादी आईएएस अधिकारी उदय प्रताप सिंह बने डीडीए के नए उपाध्यक्ष


आईएएस उदय प्रताप सिंह बने दिल्ली विकास प्राधिकरण के नए उपाध्यक्ष---

झारखण्ड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उदय प्रताप सिंह जी को दिल्ली विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है,
श्री उदय प्रताप सिंह 1984 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं,

ईमानदार और निर्भीक प्रशासनिक अधिकारी---

ये झारखण्ड से केंद्रीय प्रतिनियुकि पर चले गए थे किन्तु झारखण्ड में बीजेपी सरकार आते ही इन्हें मुख्यमंत्री रघुवर दयाल वर्मा ने वापस बुला लिया और चीफ सेक्रेटरी रैंक दे दी,

शीघ्र ही इन्हें राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया जाना था,लेकिन उदय प्रताप जी ने सिद्धान्तों से कोई समझोता नही किया और खनन की गड़बड़ी का मामला उजागर कर दिया,झारखण्ड में खनन मंत्रालय मुख्यमंत्री के ही पास था,
इससे पूरी सरकार हिल गयी, और श्री उदय प्रताप सिंह जैसे ईमानदार अधिकारी को वापस केंद्र में भेज दिया गया,
जबकि वो खनन की गड़बड़ियों की पोल न खोलते तो जल्द ही झारखण्ड के मुख्य सचिव नियुक्त होने वाले थे।।

अब इनकी नियुक्ति दिल्ली विकास प्राधिकरण में हुई है और दिल्ली में आप जानते ही हैं कि स्वघोषित राजा हरिश्चंद्र केजरीवाल जी मुख्यमंत्री हैं जो हर समस्या का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते हैं और दिल्ली की अव्यवस्था की जिम्मेदारी डीडीए और नगर निगमों पर डाल देते हैं,

पर सावधान केजरीवाल जी,आपका सामना एक निर्भीक और असली ईमानदार अधिकारी से होने जा रहा है इनपर आरोप लगाकर आप अपनी जिम्मेदारियो से नही बच पाओगे।।

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कई वरिष्ठ राजपूत अधिकारीयों की उच्च पदों पर नियुक्ति की है,
मोदी जी का आभार।

सैंकड़ो कांग्रेसियों ने लगाए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे!!!!!

हाल ही में मुरादाबाद में कांग्रेस पार्टी के रैली में सैंकड़ो कांग्रेसियो ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाकर अपने देशद्रोही होने का सबूत दिया है,सैंकड़ो कांग्रेसियो पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।

कांग्रेस पार्टी की रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगना कोई नई बात नही है

किसकी शह पर सैंकड़ो कांग्रेसियो ये खुलेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए और कांग्रेस ने क्या कार्यवाही उन गद्दारों के खिलाफ की,

इसका जवाब राहुल गांधी और कांग्रेस के कार्यकर्ता जरूर दें,

2007 में विधानसभा चुनाव के समय वेस्ट यूपी के एक चर्चित नेता के चुनाव प्रचार में नारा लगाया जाता था,
"ऊपर चचा खाजी,नीचे भतीजा इम्रान,यहीं मिलेगा पाकिस्तान"

ऊपर माने संसद में, और नीचे यानि विधानसभा में।।

इस नारे ने इतना जोश भर दिया कि भतीजा निर्दलीय ही विधायक का चुनाव जीत गया!!!

आज वो भतीजा भी खानग्रेस का बड़ा नेता है जो कभी बोटी बोटी काटने की बात करता है कभी राजपूतों के खिलाफ टिप्पणी करता है!!!

प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध है कि सीमा पार के पाकिस्तान से बाद में निपटना,
पहले देश के भीतर के गद्दारो के द्वारा आचार विचारों द्वारा बनाए गए पाकिस्तान से सख्ती से निपट लें,इनपर कड़ी कार्यवाही नही की गयी तो ये देश को भीतर से इतना खोखला कर देंगे कि देश बाहरी चुनोती का सामना नही कर पाएगा।

देशद्रोहियों को कांग्रेस का साथ इतना क्यों भांता है????
ये रिश्ता क्या कहलाता है???

Saturday, September 24, 2016

बिहार के दो जांबाज राजपूत ऑफिसर सम्भालेंगे पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था


जय भवानी,
केन्‍द्र सरकार ने हाल ही में भारत की सबसे मजबूत सुरक्षा यूनिट नेशनल सिक्‍यूरिटी गार्ड (एनएसजी) व केन्‍द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में नये डायरेक्‍टर जनरल की नियुक्ति की है । दोनों नये डीजी बिहार के प्रतिष्ठित राजपूत परिवारों से हैं

1--आईपीएस सुधीर प्रताप सिंह---एनएसजी के डीजी बने सुधीर प्रताप सिंह तो केन्‍द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी के अपने बड़े भाई हैं । नवनियुक्‍त एनएसजी डीजी सुधीर प्रताप सिंह मूल रुप से छपरा के रहने वाले हैं । सुधीर परिवार में केन्‍द्रीय मंत्री राजीव प्रताप सिंह के मंझले भाई हैं । 
ये तीन भाई हैं,रणधीर प्रताप सिंह,सुधीर प्रताप सिंह और राजीव प्रताप रुडी । सबसे बड़े रणधीर इंडियन एयर फोर्स में थे,जिन्‍होंने स्‍वैच्छिक सेवानिवृति ले ली है।सुधीर के एनएसजी चीफ बनने में परिवार में खुशी है । वे 1983 बैच के राजस्‍थान काडर के आईपीएस अफसर हैं ।

2--आईपीएस श्री ओपी सिंह---सीआईएसएफ के डीजी बने ओपी सिंह का जन्‍म गया जिले में हुआ । वे भी 1983 में आईपीएस बने ।ये यूपी काडर के आईएएस हैं । 
ओपी सिंह जी जस्टिस केबीएन सिंह के दामाद और जस्टिस समरेन्‍द्र प्रताप सिंह के बहनोई हैं।

नवनियुक्‍त दोनों आईपीएस अफसरों का सर्विस रिकार्ड बहुत ही शानदार रहा है । 

बिहार और पूर्वान्चल देश के दो ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ से सबसे ज्यादा राजपूत आईएएस और आईपीएस बनते हैं,
दोनों राजपूत अधिकारीयों को हार्दिक शुभकामनाएं 

अंतर्जातीय प्रेम विवाहों की समाज में बढ़ती घटनाएं,इसका निदान क्या हो?

अंतर्जातीय/गैरसम्प्रदाय में प्रेम विवाह की बढ़ती घटनाएं----

प्रेम विवाह ,अंतर्जातीय विवाह ,गैर सम्प्रदाय में विवाह की घटनाएं आजकल आम बात हो गयी है और कोई भी समाज इससे अछूता नही है,यहाँ तक कि क्षत्रिय समाज भी नही।।

आधुनिकता के नाम पर आजकल युवक युवतियों के स्वच्छन्द व्यवहार ,संस्कारो के आभाव,अभिभावको की लापरवाही/प्रोत्साहन से ऐसी घटनाएं खूब बढ़ती जा रही हैं,वर्णसंकरता फैलने से क्षत्रियत्व का हास हो रहा है।
अक्सर नौजवान माँ बाप की इज्जत चौराहे पर नीलाम कर उनकी जगहंसाई करवाने से जरा भी नही चूकते।।

किसी के परिवार/रिश्तेदारी में यह घटना कभी भी नही होगी यह नही कहा जा सकता!!
किन्तु ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना किसी के परिवार में हो जाए और उसमे उस परिवार का कोई योगदान न रहा हो तो इसके लिए किसी को शर्मिंदा करना या उसकी भर्त्सना करना अनुचित है।कई ऐसे माँ बाप भाई बहन जीवन भर तिरस्कार और अपमान झेलते हैं जिनके परिवार में कोई ऐसी घटना हुई हो जबकि उन्होंने इसे रोकने का पूरा प्रयास भी किया,
यह मेरी नजर में बिलकुल अनुचित है।।

परिवार में हुई ऐसी घटना होने के बाद ऑनरकिलिंग या हिंसा  भी सही नही कही जा सकती क्योंकि किसी एक की नालायकी से बाकि बचा पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है और मुकदमों/सजा से कैरियर बर्बाद होते हैं।।
मैंने ऐसे कई परिवार देखे हैं जो पहले ध्यान नही देते और बाद में विवाह होने के बाद हिंसा का सहारा लेते हैं और मुकदमेबाजी में फंसने के बाद सामने वाले परिवार से सजा से बचने के लिए मजबूरी में समझौता कर लेते हैं 😢😢
हो सकता है आपको मेरा यह कथन कायरता पूर्ण लगे,किन्तु व्यवहारिकता यही है जो लिखा है।

इसलिए अपनी संतान/अनुजो को ऐसी शिक्षा और संस्कार दें कि प्रेमविवाह जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं न हों ,
माँ बाप और बड़े भाई बहन खुद ऐसा आचरण रखें जिससे ऐसा घृणित कार्य करते हुए संतान दस बार सोचे,

गैर समाज में प्रेमविवाह से पूर्व हर सम्भव प्रयास करना चाहिए उसे रोकने का,
फिर भी कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए और हाथ से मामला निकल जाए तो बजाय क़ानूनी पचड़ों के उस नामुराद से परिवार और रिश्तेदारो को सम्बन्ध विच्छेद और बहिष्कार करना ही पर्याप्त है।।

किन्तु ऐसा घृणित कार्य करने के बाद इन अंतर्जातीय/अंतरधार्मिक/सगोत्र विवाह करने वाले जोड़ों से सम्बन्ध बनाए रखना,और उन्हें मान्यता देने का अर्थ यही है कि कहीं न कहीं इस शर्मनाक घटना में आपकी संलिप्प्ता अवश्य है और आपने स्वयं अपने चरित्र से परिवार में कोई अच्छा उदाहरण पेश नही किया और न ही अपनी संतान को संस्कार दिए हैं,
एक बार ऐसी घटनाओं के बाद भी सम्बन्ध बनाए रखे तो उस परिवार में और उनकी रिश्तेदारी में ऐसी कई और घटनाए एक के बाद एक होती हैं और उन्हें रोकने का फिर कोई नैतिक बल नही रह जाता।।

हाल ही में सोशल मिडिया पहलवान अजीत सिंह का मुद्दा सुर्ख़ियो में है,
जो शख्स दिन भर हिंदुत्व का जाप करके दूसरे सम्प्रदाय को गालियां देने में व्यस्त रहता है और हर मुद्दे पर मोदी सरकार का बेशर्मी से बचाव करता था,
उसके बारे में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि उसकी खुद की बहन ने उसी सम्प्रदाय के युवक से प्रेम विवाह किया है जिसको दिन भर ये पहलवान सोशल मिडिया पर गालियां देकर खुद को बड़ा हिंदुत्ववादी बनता है 🙊🙊🙊🙊

चलिए हो सकता है ये प्रेमविवाह इसके परिवार की मर्जी से न हुआ होगा तो इसकी भर्त्सना अनुचित है,
लेकिन यहाँ भी खुलासा हुआ है कि इसका परिवार अपनी उस बहन के गैर सम्प्रदाय वाले परिवार से पूरी तरह न सिर्फ जुड़ा है बल्कि उनसे सारे रिश्ते भी निभाता है,
अब ऐसे व्यक्ति का जो दिन भर सोशल मिडिया पर हिंदुत्व और मोदिभक्ति का पाठ पढ़ाए खुद के जीवन में कैसा आचरण करता है आप स्वयं देख लीजिये,

ऐसे धूर्त दुष्टों का अवश्य सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए,यह मेरी राय है जरूरी नही कि आप मुझसे सहमत हों।
आप अपनी राय से जरूर अवगत करायें।

जय श्रीराम 

Sunday, September 18, 2016

Saturday, September 17, 2016

हुमायूँ के विश्वासघात ने हजारो क्षत्राणियों को जौहर की अग्नि में जलने को विवश कर दिया, Humayun the traitor


चित्तौड़ की महारानी कर्मावती और हुमायूँ-राखी प्रकरण का सच क्या है??

वामपंथी/कांग्रेसी/सेक्युलर पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है कि मध्यकाल में चित्तौड़ की महारानी कर्मावती (कर्मवती अथवा कर्णावती) ने गुजरात के शासक बहादुरशाह के हमले के समय मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजी थी और बदले में हुमायूँ ने भाई का फर्ज निभाते हुए सेना के साथ जाकर रानी कर्मावती और चित्तौड़ की रक्षा की थी,

जबकि ये कोरा झूठ है,सच्चाई क्या है ये जानने के लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़ें और शेयर भी करें,

जब तक राणा सांगा जीवित थे तब तक उन्होंने मालवा गुजरात और दिल्ली के सुल्तानों को बार बार पराजित किया और किसी मुस्लिम शक्ति की मेवाड़ की ओर आँख उठाने की भी हिम्मत नही थी,लेकिन खानवा के युद्ध के बाद राणा सांगा की मृत्यु हो गयी,इस युद्ध से राजपूत शक्ति को गहरा आघात पहुंचा,और कोई योग्य शासक उस समय मेवाड़ में नही था,ऐसे में गुजरात के शासक बहादुरशाह ने 1535 ईस्वी में मेवाड़ से बदला चुकाने के लिए एक बड़ी सेना लेकर आक्रमण कर दिया,

इस विकट स्थिति में सहायता की कोई अन्य आशा न देखकर महारानी कर्मावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर उससे सहायता मांगी।

दरअसल हुमायूँ सेना लेकर चित्तौड़ की रक्षा के लिए चला जरूर था,लेकिन इसी बीच उसे गुजरात के शासक बहादुरशाह का पत्र मिला जिसने लिखा था कि वो मुसलमानो की तरफ से भारत के सबसे बड़े काफ़िर राज्य के खिलाफ जिहाद कर रहा है,
यह पत्र मिलते ही हुमायूँ भाई का फर्ज भूलकर ग्वालियर में ही रुक गया,और एक माह रुककर वापस चला गया!!!!

कथित राखी भाई से कोई मदद न मिलने पर महाराणा सांगा की पत्नी महारानी कर्मावती ने हजारो क्षत्रिय वीरांगनाओ के साथ मिलकर जौहर की चिता में जलकर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए,और राजपूत सैनिको ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए
लेकिन वो धूर्त हुमायूँ इस्लाम और जिहाद के सामने राखी का बन्धन भुला बैठा!!!
जबकि इस धूर्त को विपत्तिकाल में अमरकोट के राजपूत राजपरिवार ने शरण दी थी जहाँ अकबर का जन्म हुआ था।

ये गुजरात का बहादुरशाह भी धर्मपरिवर्तित राजपूतों का ही वंशज था,
इसके पूर्वज हरियाणा के थानेश्वर के नागवंशी टाक राजपूत थे,साहरण टाक ने सल्तनत काल में इस्लाम धर्म गृहण किया और इसे दिल्ली के सुल्तानों ने पहले राजपूताना और बाद में गुजरात का सूबेदार बनाया,
दिल्ली के सुल्तानों के कमजोर होते ही ये स्वतन्त्र हो गया,और मुजफ्फरशाह के नाम से गुजरात की गद्दी पर बैठा।
इसकी कई पीढ़ियों ने गुजरात में राज किया,जिनमे महमूद बेगड़ा और बहादुरशाह प्रमुख थे।
इस धर्मपरिवर्तित राजपूत वंश ने हिंदुओं/राजपूतों पर जुल्म ढाने में तुर्कों मुगलो पठानों को भी पीछे छोड़ दिया,
इस्लाम और जिहाद की भावना के आगे राजपूती रक्त का इनकी नजरो में कोई मान था ही नही।।

जब तक महाराणा कुम्भा और सांगा जैसे शूरवीर मेवाड़ में थे तब तक इन गुजरात और मालवा के सुल्तानों की ओकात नही थी कि वो मेवाड़ की तरफ आँख भी उठाकर देख सकें,
किन्तु खानवा के युद्ध के पश्चात् महाराणा सांगा की मृत्यु के बाद इन गीदड़ो को मेवाड़ से पुरानी दुश्मनी का हिसाब चुकता करने का मौका मिल गया।।।
सवतंत्रता प्राप्ति के बाद नेहरू के इशारे पर वामपंथी इतिहासकारो ने छदम हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए मुस्लिमो को महिमामण्डित करने हेतु यह झूठ फैलाया कि हुमायूँ ने हिन्दू रानी कर्मावती द्वारा भेजी गयी राखी की लाज रखते हुए मेवाड़ की मदद की थी,
जबकि सच यह है कि हुमायूँ के विश्वासघात की वजह से ही रानी कर्मावती और हजारो क्षत्राणियों को जौहर की अग्नि में भस्म होना पड़ा था।।

क्या केंद्र की मोदी सरकार देशभर के पाठ्यक्रमो में महारानी कर्मावती हुमायूँ राखी प्रकरण का सच बताने का साहस करेगी??????

Thursday, September 15, 2016

शहाबुद्दीन की रिहाई में केंद्र सरकार की लापरवाही भी जिम्मेदार??

शहाबुद्दीन की रिहाई में केंद्र सरकार की लापरवाही भी जिम्मेदार??
आज सारे देश में बिहार के दुर्दांत अपराधी/आरजेडी मौहम्मद शहाबुद्दीन की पटना हाईकोर्ट द्वारा जमानत पर रिहाई चर्चा का विषय बनी हुई है,सारे बिहार में आतंक की लहर दौड़ गयी है।

शाहबुद्दीन की रिहाई के लिए लालू प्रसाद और नितीश कुमार की सरकार के अलावा पटना हाईकोर्ट की भी कड़ी आलोचना देश भर में हो रही है।।

लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बाहुबली शहाबुद्दीन की रिहाई के लिए केंद्र सरकार की लापरवाही भी बराबर की जिम्मेदार है।

शहाबुद्दीन पर दर्जनों हत्याओं का आरोप है और वो लालू प्रसाद की आरजेडी का मुस्लिम चेहरा है ये सभी जानते हैं,बिहार में भले ही आरजेडी और जेडीयू मिलकर सरकार चला रहे हों लेकिन शहाबुद्दीन का बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से छत्तीस का आंकड़ा रहता है।।
जब से लालू प्रसाद के समर्थन से नितीश पुन बिहार के सीएम बने हैं तब से लालू के दम पर शहाबुद्दीन फिर से अपने रंग में आ गया है और हाल ही में एक पत्रकार राजदेव रंजन (अहीर) की हत्या में उसके गुर्गों की भूमिका पाई गयी है,

राजदेव रंजन की हत्या इसी साल 13 मई को हुई थी.
नितीश कुमार शहाबुद्दीन के विरुद्ध था इसलिए तीन दिन बाद ही राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी थी.
लेकिन केन्द्र सरकार कई महीने बीत जाने पर भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
मृतक पत्रकार राजदेव की पत्नी आशा रंजन पिछले दिनों से दिल्ली में रहकर सरकार से गुहार लगा रही थी.
लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी मांग अनसुनी कर दी,

केंद्र सरकार की ओर से निश्चिन्त होते ही लालू ने नितीश सरकार पर दबाव डालकर हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी कमजोर करवा दी जिससे मौहम्मद शहाबुद्दीन को जमानत मिल गयी!!!!!

अगर राजदेव रंजन हत्याकांड की सीबीआई जाँच की अनुशंसा केंद्र सरकार मान लेती तो शहाबुद्दीन की किसी भी दशा में रिहाई नही हो पाती!!

अब जाकर केंद्र सरकार नींद से जागी और 4 महीने बाद उसने इस हत्याकांड की सीबीआई जाँच की हरी झण्डी दी है।।

अब सवाल यह है कि एक दुर्दांत अपराधी जिसपर हिंदुत्ववादी कई बार पाकिस्तान से सम्बन्धो का आरोप लगाते रहे हैं उसके प्रति केंद्र सरकार की नरमी क्या संकेत देती है????

जो समझ में आता है वो ये है -----
इंदिरा गांधी ने कम कट्टर सिक्ख अकालियों को काटने के लिए घोर कट्टर जनरैल सिंह भिंडरावाले को बढ़ावा दिया था,जिसके परिणामस्वरूप पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा मिला और हजारो निर्दोष नागरिको सुरक्षा बलों की जान गयी,
इंदिरा गांधी को राजनितिक लाभ तो क्या मिलता उल्टा उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा!!!!

शेर/भेड़िये की सवारी कभी लाभ नही देती,
पर बीजेपी की केंद्र सरकार के रणनीतिकार सबक सीखने को तैयार नही हैं,
बीजेपी के समर्थको और रणनीतिकारों की सोच है कि ओवेसी बन्धुओ और उनकी घोर कट्टरवादी पार्टी एमआईएम को उत्तर भारत में बढ़ने दिया जाए जिससे मुस्लिम वोट बंट जाए और बीजेपी को लाभ मिले,

जबकि ओवेसी बन्धुओ की बिहार हो या दिल्ली कहीं भी सक्रियता का बीजेपी को कोई लाभ नही हुआ बल्कि मुस्लिमो को उसने बीजेपी के विरुद्ध रणनीतिक मतदान के लिए एकजुट कर दिया,

ओवेसी बन्धु जिस प्रकार देश में साम्प्रदायिक माहौल खराब कर रहे हैं उनके विरुद्ध केंद्र सरकारो को कड़ी क़ानूनी कार्यवाही करना चाहिए ,
पर बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि ओवेसी अपना प्रभाव उत्तर भारतीय राज्यो में भी बढ़ाए!!!

ये आत्मघाती रणनीति पंजाब की तरह ही विनाशक सिद्ध होगी ये तय है इससे बीजेपी को कभी लाभ नही मिलेगा बल्कि ओवेसी के दम पर मुस्लिम और कट्टरता की ओर बढ़ेंगे जिससे उत्तर भारत में अगले दशक में भारी उथल पुथल हो सकती है।।

मोदी सरकार ने इंदिरा गांधी सरकार से सबक नही लिया और कई भिंडरावाला बनाने की तैयारी है,

शहाबुद्दीन के विरुद्ध सीबीआई जाँच की संस्तुति पर 4 महीने तक केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही,क्या ये इसी रणनीति का हिस्सा था???

Tuesday, September 13, 2016

मोदीभक्तों द्वारा ईमानदार और सिद्धान्तवादी जस्टिस टीएस ठाकुर का चरित्रहनन क्या उचित?


हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री तीर्थ सिंह ठाकुर चर्चाओं में रहे हैं,
उन्होंने स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर प्रधानमन्त्री मोदी जी को उच्च अदालतों में जजों की संख्या पूरी न किये जाने पर आगाह किया था,
तब से जस्टिस ठाकुर धूर्त मोदिभक्तों के निशाने पर आ गए हैं,सोशल मिडिया पर मोदीभक्त जस्टिस ठाकुर पर तरह तरह के आरोप लगाकर उनका चरित्रहनन कर रहे हैं,
यह कोई नई बात नही है मोदीभक्त पहले से ऐसी धूर्तता,मूर्खता और अंधभक्ति के लिए कुख्यात रहे हैं ।

मोदीभक्त सोशल मिडिया पर जस्टिस ठाकुर पर दो आरोप लगा रहे हैं,
आरोप संख्या 1--
जस्टिस ठाकुर का परिवार कांग्रेसी रहा है और वो कांग्रेस की कृपा से ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं!!!!

इसका जवाब---
उनके पिता श्री देवीदास ठाकुर भी न्यायविद थे,जम्मू कश्मीर एक अशांत क्षेत्र रहा है,जब जम्मू कश्मीर में गुलाम मौहम्मद शाह की सरकार बनी तो भारत सरकार के परामर्श से विधिक मामलो की देखरेख के लिए वो न्यायिक सेवा छोड़कर जम्मू कश्मीर मन्त्रीमण्डल में शामिल हुए थे,राजनीति उनका पेशा नही था बल्कि राष्ट्रहित और राज्य की विकट स्थिति पर नजर रखने को वो राज्य सरकार में शामिल हुए थे,
यूँ तो अटल बिहारी वाजपेयी भी नेहरू के प्रशंसक थे,डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी नेहरू सरकार में मंत्री बने थे,क्या वो भी कांग्रेस के चमचे हो गए?????👆👆

जब जस्टिस टीएस ठाकुर के पिता जम्मू कश्मीर राज्य सरकार में मंत्री थे तब वो जम्मू कश्मीर बार एशोसिएशन के अध्यक्ष थे,इस सरकार के कार्यो के विरुद्ध जब प्रदर्शन हो रहे थे तब
इन्ही टीएस ठाकुर ने अपने पिता की सरकार की बर्खास्तगी की भी मांग कर दी थी.

जस्टिस ठाकुर को लंबे समय से जानने वाले और वरिष्ठ वकील बीएस सलाथिया कहते हैं, "तीरथ सिंह ठाकुर हमेशा से सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने का माद्दा रखते थे".💪💪

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब वे अपने पिता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकते हैं तो आप समझ जाइए कि वो ग़लत होते हुए नहीं देख सकते हैं.
ऐसे सिद्धान्तवादी न्यायविद पर झूठे आरोप लगाने में मोदिभक्तो को लज्जा नही आती??🐴🐴

आरोप संख्या 2---
मोदिभक्तों का जस्टिस ठाकुर पर आरोप है कि वो अपने रिश्तेदारों को coliseum system के माध्यम से जज बनवाना चाहते थे जिसे मोदी सरकार ने अनसुना कर दिया,इसलिए वो मोदी से नाराज हैं,

इसका जवाब---
ये एकदम झूठा और बेबुनियाद आरोप है,जो संस्तुति स्वीकृति के लिए भेजी गयी है उसमे जस्टिस ठाकुर के किसी रिश्तेदार का दूर दूर तक कोई नाम नही है,
रही बात जजो की नियुक्ति से सम्बंधित coliseum system की,तो वो प्रणाली शुरू से देश में लागु है,क्या जस्टिस ठाकुर ने बनाई है जजो की नियुक्ति से सम्बंधित coliseum system प्रणाली ?????

आज ऊपरी और निचली अदालतों में जजो की कमी के कारण करोड़ो केस पैंडिंग पड़े हैं,आम जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ गया है,
मोदी सरकार भी इस मुद्दे पर हाथ पर हाथ धरे बैठी है,क्या इस मुद्दे पर सरकार को आगाह करना मोदिभक्तो की नजर में गुनाह हो गया???

और वो जिस पद पर आज हैं वहां वो भला कैसे चुप रह सकते हैं जब पूरे देश में जजों की इतनी कमी है.
अब जम्मू कश्मीर उच्च न्यायलय को देख लीजिए. यहाँ 17 स्वीकृत पद हैं मगर जजों की मौजूदा संख्या सिर्फ आठ है. तो वो भला कैसे नहीं बोलें??
उन्होंने कहा था कि अगर जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार कुछ नहीं करती है तो फिर न्यायपालिका को ही हस्तक्षेप करने पर मजबूर होना पड़ेगा.⛳⛳

तीर्थ सिंह ठाकुर अगर चीफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं तो अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर बने हैं, किसी खान्ग्रेसी,खाजपाई के रहमोकरम पर नही,
अगर कोई सोचता है कि अनर्गल मिथ्या प्रचार करके वो सिद्धान्तवादी जस्टिस ठाकुर साहब का मुँह बन्द कर देंगे तो उसकी भूल है।💪💪

आज हालत ये हो गयी कि कोई सही मुद्दे पर भी मोदी सरकार को चेताए या उसकी आलोचना करे तो धूर्त, मुर्ख और बेशर्म मोदीभक्त तुरन्त उसपर देशद्रोही,कांग्रेसी,आपिया,भृष्ट का लेबल चिपकाकर शोशल मिडिया पर चरित्रहनन शुरू कर देते हैं🐮🐮
क्या गलत कहा जस्टिस ठाकुर ने कि नारों और जुमलों से विकास नही होता??

अगर मोदी की अंधभक्ति ही तुम्हारा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है तो ईश्वर भारतवर्ष,और सनातन धर्म की रक्षा करे💐💐

प्रतियोगी परीक्षाओं में जाटों का तहलका,स्वाभाविक प्रतिभा या जुगाड़बाजी?

हाल ही में हरियाणा प्रशासनिक सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित हुए,
विभिन्न पदों पर कुल 55 उम्मीदवार सफल घोषित हुए,

बिना ओबीसी आरक्षण के जाटों ने मचाया तहलका,

सामान्य अनारक्षित के 30 में से 22 सफल उम्मीदवार जाट समाज से, दोबारा ध्यान से सुनो---(बिना ओबीसी आरक्षण के)

मेरिट लिस्ट के टॉप के तीनो उम्मीदवार जाट👊👊👊👊

जाटों ने ब्राह्मण बनियो पंजाबियों कायस्थ जैसे वर्गों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में मीलो पीछे छोड़कर झंडा गाड़ दिया,
अपनी मेहनत से,जज्बे से और जूनून से!!!
👆👆👆👊👊👊

जानते हो अक्सर हरियाणा में कभी 3%, तो कभी 5% जनसंख्या बताए गए राजपूत समाज का रिजल्ट क्या रहा??????
राजपूतो का रिजल्ट रहा (00/00 )👊👊👊👊👊👊👊

एनडीए/सीडीएस के माध्यम से सेना में भी अधिकारी स्तर पर भी जाटों ने हरियाणा यूपी राजस्थान के राजपूतो को बुरी तरह पछाड़ दिया है,
सिर्फ हिमाचल/उत्तराखण्ड के पहाड़ी राजपूत सैन्य अधिकारी स्तर पर थोड़ी इज्जत बचाए हुए हैं!!

सेना में भी पिछड़ गए तो हम क्षत्रिय कहलाएंगे या जाट??

किसी को पता भी नही चला कि हाल ही में जाट रेजिमेंट की 23 वी बटालियन भी खड़ी हो गयी,जिसमे 95% जाट हैं,

जबकि राजपूत रेजिमेंट की 20 बटालियन में सिर्फ 50% राजपूत हैं और 30% गुज्जर!!!!

बिना प्रशासन/सैन्य अधिकारी संवर्गो में सम्मानजनक जगह बनाए आज का राजपूत युवा सोचता है कि वो दोबारा अपने बाहुबल से देश की सत्ता पर कब्जा करेंगे,
लोकतन्त्र को जड़ से उखाड़ देंगे और फिर से राजतन्त्र की स्थापना करेंगे,इसीलिए 15 अगस्त और 26 जनवरी को हममे से अधिकांश बधाई नही देते,
⛳⛳⛳⛳
😂😂😥😥😴😴
👆👆👆
अरे मूर्खों पव्वा पीते हुए सपने देखना छोड़ दो,
देश की प्रभुसत्ता पर कब्जा करने की ओर कोई तेजी से बढ़ रहा है तो वो आज की नवसामन्तवादी जातियां हैं
जितनी भारी संख्या में सैन्य अधिकारी/प्रशासनिक सेवाओ में जाट पिछले 5 साल से भर्ती होने लगे हैं वो कमाल की तेजी है और कभी न कभी इसका दुष्परिणाम देखने को जरूर मिलेगा

प्रतिरक्षा सेना/सेवाओं में भी कोई आरक्षण नही है,
स्पोर्ट्स में भी कोई आरक्षण नही है!!!

हरियाणा की 60% भूमि और 50% सरकारी नोकरियो पर कब्जा रखने वाला जाट समाज ओबीसी कोटे को भी चट करने के लिए ओबीसी आरक्षण मांग रहा है!!!

जबकि गुजारे के लिए जमीन बेचने वाले और 0.05% प्रतिशत सरकारी नोकरियो वाले महानतम "क्षत्रिय" समाज के कई यौद्धा आरक्षण के नाम पर कहते हैं कि हम नही मांगेगे आरक्षण!!!
हम क्षत्रिय हैं!!!!
अबे __यो तुम्हे दे कौन रहा है आरक्षण?????

जय राजपूताना,
अगली महाराणा प्रताप जयंती कब है????

जो क्षत्रिय हितैषी नही,उनका कैसा महिमामण्डन??


आपको याद होगा करीब एक वर्ष पहले दादरी के राजपूत बाहुल्य बिसहाड़ा गांव में गौहत्या को लेकर विवाद हुआ था और अख़लाक़ नाम के व्यक्ति की जान चली गयी थी...

कुछ दिन पहले फोरेंसिक laboratory जाँच में आया है कि अखलाख के घर से बरामद गौमांस अवशेष ही था,
लेकिन उस घटना को मोदी विरोधी पत्रकारो द्वारा अपनी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से अलग ही रंग दे दिया गया था।।। #presstitutes
उनके द्वारा गौहत्या के आक्रोश के कारण संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत से जुड़े मामले को बीफ खाने की अफवाह के कारण हत्या के रूप में प्रचारित कर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया था,
हालाँकि कानून अपने हाथ में लेना गलत था,

ऐसे ही पत्रकारों में एक थे श्रीपाल शक्तावत जी,
उन्होंने लगातार इस मुद्दे पर एकपक्षीय लिखा था,
मुझे याद है उन्होंने अपनी वॉल पर लिखा था कि
"बीफ के बहाने इंसानियत की हत्या","नरेंद्र मोदी जवाब दें"....

ऐसी ही एक के बाद एक कई पोस्ट में वो इस मुद्दे पर लिखकर बिना किसी जाँच के उस गांव के बहुसंख्यको(राजपूतो) को कटघरे में खड़ा करते रहे और दूसरे अल्पसंख्यक पक्ष को क्लीन चिट देते रहे!!

जब उनकी फेसबुक वॉल पर जाकर राजपूतो ने उनसे दुष्प्रचार न करने का आग्रह किया था तो उन्होंने दर्जनों राजपूतों को ब्लॉक कर दिया था!!
बिना जाँच के बिसहाडा के राजपूतो को हत्यारा मानकर और उनके द्वारा बताए गए गौहत्यारो से सहानुभूति दिखाकर ये कौन सा फर्ज निभा रहे थे????

इन महाशय जी की वॉल पर उस समय नजर दौड़ाई तो पता लगा कि ये महाशय modinomia से ग्रसित है और कुछ नही। पैथोलॉजिकल hatred है इनमे मोदी और भाजपा के प्रति!!
सेकुलरिज्म का चसका है।
कोई तर्क वादी बात नही करते ना ही कोई जमीनी ज्ञान है।
सारे लुटियन की मीडिया वाले लक्षण है जिन्हें आता कुछ नही, show off करने के लिये सेक्युलर बनते हैँ।
मोदी से खुन्नस निकालने को मीडिया के झूठ पर भी आँख मूंद कर विश्वास करने को तैयार हैँ।

यहां तक की उन्होंने उस मुद्दे पर राजपूतों के बहुत से शालीन कमेंट तक को डिलीट कर दिया क्योंकि वो इनकी बात से असहमत थे!!
इनके जैसो पत्रकारों की एकपक्षीय रिपोर्टिंग से बने दबाव के कारण ही आज बिसहाडा के दर्जनों राजपूत युवा हत्या के केस में फंसे हुए हैं....

कम से कम इनके उस आचरण को देखकर किसी भी दृष्टि से ये राजपूत हितैषी नजर नही आए,
अगर राजपूत हितैषी होते तो उस घटना को लेकर मिडिया के एक वर्ग के दुष्प्रचार का खण्डन करके सही तथ्य सामने लाते.
या हो सकता है कि ये जातिवादी तो हों पर इनका जातिवाद एक क्षेत्र विशेष तक सिमित हो!!!!

आज राजपूत बन्धुओं द्वारा सोशल मिडिया पर किन्ही श्रीपाल शक्तावत जी को आज तक चैनल में विशेष संवाददाता के रूप में नियुक्त होने के बधाई सन्देश देखे तो एकाएक वो प्रकरण याद आ गया😥😥

मुझे नही पता कि ये वो ही श्रीपाल शक्तावत जी वो ही हैं या दूसरे कोई और हैं??

अगर वहीँ हैं तो एकदम सही चैनल में गए हैं⛳⛳
इन्हें बधाई

जय राजपूताना

Sunday, September 11, 2016

आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में राजपूतों का बीजेपी को एकतरफा समर्थन

आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में राजपूतों का वोट किस ओर जाएगा??
न्यूज़ चैनल पर जो सर्वे दिखा रहे हैं उनमे 55% से 60% राजपूत वोट बीजेपी को दिखाया जा रहा है जबकि 90% से ज्यादा राजपूत वोट बीजेपी को जा रहा है,

लेकिन यह एकतरफा समर्थन तभी होगा जब योगी आदित्यनाथ अथवा राजनाथ सिंह को सीएम उम्मीदवार बनाया जाए,इनके अतिरिक्त बीजेपी ने किसी और को सीएम उम्मीदवार बनाया गया तो इस समर्थन में भारी गिरावट होगी और सपा को लाभ मिलेगा,

यूपी में 9% शुद्ध राजपूत वोट हैं,जो 12% के बराबर असर रखते हैं,इनके अलावा राजपूत समाज की दर्जनों उपजातियां हैं जो ओबीसी में आती हैं पर अपने अपने इलाकों में राजपूत उम्मीदवारों को ही वोट करती हैं इनकी कुल आबादी भी लगभग 5% से 7% हैं,
इनके अलावा यूपी में मुस्लिमो में भी बड़ी संख्या राजपूतों की हैं जो बीजेपी के अलावा किसी दल से राजपूत उम्मीदवार खड़ा हो तो उसका पुरजोर समर्थन करते हैं
इनकी कुल आबादी भी यूपी में करीब 3% से 5% के बीच है।

इस प्रकार उत्तर प्रदेश राजपूत बाहुल्य प्रदेश है यहाँ 20% से 25% तक राजपूतों का असर है जो एकजुट हो जाए तो किसी भी दल को हरा या जिता सकते हैं,

यूपी के कुल 403 विधायकों में इस समय 55 विधायक राजपूत हैं जो पहले की तुलना में कम है,जब वीपी सिंह अस्सी के दशक में सीएम बने थे तो राजपूत विधायको की संख्या ऐतिहासिक रूप से 112 तक पहुंच गयी थी।।बिच में भी 70 से 80 विधायक लगातार बनते आए हैं।।

यूपी में कुल 80 सांसदों में इस समय 14 सांसद राजपूत हैं,कल्याण सिंह जब सीएम थे तो 20 सांसद यूपी से राजपूत चुने गए थे।।

इस समय यूपी की सपा सरकार में 10 मंत्री राजपूत हैं जबकि राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में 22 मंत्री राजपूत थे,मुलायम सिंह की 2003-2007 सरकार में भी 19 मंत्री (अधिकांश महत्वहीन विभाग) राजपूत बने थे..

यूपी विधानपरिषद में भी राजपूतों का बोलबाला रहा है,स्थानीय निकाय की 36 सीटों के चुनाव में इस बार 12 राजपूत विजयी हुए हैं जबकि जब राजनाथ सिंह यूपी बीजेपी के अध्यक्ष थे और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे तो इन 36 में से 29 टिकट राजपूतों को दिए गए थे जिनमे 27 चुनाव जीत गए थे,(सहारनपुर-मुजफ्फरनगर सीट से ठाकुर जगत सिंह हारने वालो में शामिल थे),
इनके अलावा शिक्षक/स्नातक कोटे की विधानपरिषद सीटों में भी राजपूतो का बोलबाला रहा है।

जिला पंचायतों में भी आरक्षण के बावजूद यूपी में राजपूतों की दमदार उपस्थिति है,हाल ही में हुए पंचायत चुनावो में 75 जिला पंचायतो में से 12 जिला प्रमुख(चैयरमैन) राजपूत चुने गए हैं।।

इतनी जबरदस्त ताकत होते हुए भी यूपी में राजपूत समाज उपेक्षा का शिकार है,यहाँ पिछले 70 सालों में 04 मुख्यमंत्री राजपूत बने,पर चारो मिलकर 07 वर्ष भी राज नही कर पाए,

सर्वोच्च सत्ता के आभाव में यहाँ का राजपूत बुरी तरह से शिक्षा/प्रशाशनिक सेवाओं/सरकारी नोकरियो में बुरी तरह पिछड़ गया है,पिछले 15 वर्ष में हालत बदतर हो गयी है राजपूत अपनी आबादी के अनुसार भी सरकारी पदों पर भर्ती नही हो पा रहे हैं क्योंकि सपा सरकार में अहिरो और बसपा सरकार में दलितों का ही बोलबाला रहता है,

राजपूत कुल आबादी में 20% प्रभाव होने के बावजूद एकजुटता और सर्वोच्च सत्ता(मुख्यमंत्री) के आभाव में 9% अहीरों और 13% जाटवों की गुलामी करने को मजबूर हैं।

सपा-बसपा जैसे दल राजपूतो को मजबूरी में सांसद/विधायकी टिकट और मंत्री पद तो देते हैं पर सत्ता में हिस्सेदारी/नोकरिया नही देते,इन दलों की सरकारो में राजपूत विधायक सांसद मंत्री होते हुए भी राजपूतों का जमकर उत्पीड़न होता है और उत्पीड़न करने वाला अहीर दलित या मुस्लिम हो तो ये राजपूत सूबेदार पीड़ित राजपूतो की शिकायत सुनने से भी घबराते हैं कि कहीं उनकी सूबेदारी न छिन जाए।

मुगल काल में कुछ राजपूत सूबेदार/सामन्त की स्थिति में थे इसी प्रकार कुछ राजपूतो को सूबेदारी देकर सपा बसपा के अहीर और दलित राजपूत समाज को बिना कोई लाभ दिए अपना गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं।।

इतिहास में सूबेदारों/सामन्तों को कभी सम्मान न तो मिला है न ही कभी मिलेगा,भले ही उनमे कुछ उपयोगी रहे हों,

राजपूतों को यूपी में अपना पुनरुद्धार करना है तो सर्वोच्च सत्ता (राजपूत मुख्यमंत्री) की बेहद आवश्यकता है,
और यह उम्मीद सिर्फ बीजेपी से ही पूरी हो सकती है इसीलिए राजपूत समाज बीजेपी के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।।

बस अब बहुत गया,
बन्द करो सपा-बसपा की सूबेदारी,
योगी जी के नेतृत्व में क्षत्रिय राज की बारी।

बन्द करो अहीरों-दलितों की ताबेदारी,
क्षत्रियों के नेतृत्व में हिन्दू राज की बारी।।

जय भवानी।।

Friday, September 9, 2016

तो अब विकिपीडिया पर जीवित हस्तियों की भी जातियां बदली जा रही हैं??अभी तक तो ऐतिहासिक नायको की ही जाति बदली गयी थी!!

सुप्रभात सभी मित्रों को..💐💐💐 #पोल_खोल

सिद्धांतत: देश का नाम रोशन करने वालो /देश पर जान न्यौछावर करने वालो और देश का नाम शर्मसार करने वालो की कोई जाति नही होती,वो पुरे देश की धरोहर होते हैं,

फिर भी वो शख्सियत जिस समाज में जन्म लेती है वो समाज उस पर गर्व करे तो कोई बुराई नही है,

जिस समाज में ऐसे व्यक्तित्व का आभाव होता है उसे आत्मावलोकन/चिंतन करने में भी कोई बुराई नही होती है।।

साक्षी मलिक के रियो ओलिम्पिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतते ही पुरे देश में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी,
जाति धर्म से ऊपर उठकर वो पुरे देश की बहन बेटी बन गयी,
लेकिन जाट भाइयों ने राष्ट्रिय गौरव के इस मौके का फायदा उठाकर सभी गैर जाटों को गरियाना शुरू कर दिया कि देखो पदक जीतने का दम सिर्फ जाटों में होता है,
यही नही इस बहाने उन्होंने हरियाणा में जाट आंदोलन में हुए भीषण अत्याचारो पर हुई उनकी आलोचना को भी गलत बताना शुरू कर दिया,और सभी जाट पेजो पर लिखा गया कि जाट ही मुसीबत के समय देश के काम आते हैं तो जाटों को आरक्षण क्यों नही मिलता???

लेकिन कल बैडमिंटन में दक्षिण भारत हैदराबाद की तेलगु भाषी खिलाडी पीवी सिंधु ने फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया और देश को गोल्ड मेडल की आस जगा दी।

तो इन जाटवादियों को अपना बनाया हुआ भृमजाल टूटता नजर आया तो इन्होंने पीवी सिंधु को पीवी संधु जाट बताना शुरू कर दिया,जबकि वो ब्राह्मण परिवार से है।
विकिपीडिया पर पीवी सिंधु के आर्टिकल को एडिट करके उन्हें तेलगु जाट लिख दिया और आर्टिकल लॉक करवा दिया।
😂😂😂😂😂

मुझे लग ही रहा था कि ऐसे भोंडे प्रयास होंगे तो टॉक पेज पर शिकायत दर्ज करवाई गयी,थोड़ी देर में गलती सुधार कर तेलगु लिख दिया गया,
लेकिन देर रात फिर से किसी शरारती जाट ने पीवी सिंधु को जाट लिख दिया,जो फिर से ठीक करवाया गया है,

एडिट वॉर अभी जारी है 👊👊👊👊।

"तेलगु जाट" 😂😂पढ़ कर मुझे इतनी हंसी आई कि रात ये पोस्ट लिखने की हिम्मत नही हुई!!!

दो साल पहले राजस्थान की शूटर अपूर्वी चंदेला ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था तो गुर्जर भाइयों ने विकिपीडिया एडिट करके उन्हें राजपूत से गुर्जर लिख दिया,
यही नही अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने अपूर्वी की माँ का नाम बिंदु राठौर से बदलकर बिंदु राठी लिख दिया,
और गुर्जर पेजो पर जयजयकार के नारे लगाए जाने लगे
😛😛😛😛
जबकि अपूर्वी चंदेला का परिवार बहुत ही प्रतिष्ठित राजपूत परिवार है,
वो गलती उस समय ठीक करवाई गयी,
पर गूजरों ने अपनी बेशर्मी उस समय दिखा दी,

जब ज़िंदा लोगो को ये लोग विकिपीडिया पर जाट और गुर्जर  बना सकते हैं तो ऐतिहासिक महापुरुषों और राजपूत राजवंशो को कहाँ छोड़ा होगा!!!
इंटरनेट पर भारत के इतिहास का सर्वनाश कर दिया गया और राजपूतों के इतिहास पर कब्जा जमाने की बेशर्मी से होड़ लगी है।

चंगेज खान,ईसा मसीह,राम-कृष्ण,हनुमान,शिवजी,एडोल्फ हिटलर, से लेकर पृथ्वीराज चौहान,मिहिरभोज प्रतिहार, शिवाजी, अनंगपाल तोमर,भोज परमार,हर्षवर्धन बैस,अक्षय कुमार,अर्जुन रामपाल,अमीषा पटेल, कपिलदेव,
गामा पहलवान, मुकेश ऋषि, दिलीप सिंह जूदेव, जैसे सैंकड़ो को बेशर्मी से गुर्जर--जाट लिखा जा रहा है 😂😂😂😂😂

और अब ये पहुंच गए दक्षिण भारत और तेलगु जाटों से भी देश का परिचय करवा दिया😂😂😂😂😂😂😂

क्या मिलता है इन्हें ये सब करके????

इंटरनेट के अनुसार महान जाटो की सूचि-------------ईसा मसीह,हिटलर, मुसोलिनी, चंगेज खान, क्लियोपेट्रा, सिकन्दर,पोरस, सद्दाम हुसैन,
ओबामा-ओसामा, क्वीन एलिजाबेथ,क्वीन विक्टोरिया,
रोमन-जर्मन,अरबी,चीनी, सोनिया गांधी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, जटायु, जामवन्त, हनुमान जी,भगवान शंकर,नल-नील, सुग्रीव,बाली,शिवगण वीरभद्र, कौरव पांडव, महावीर जैन, गौतम बुद्ध, चन्द्रगुप्त मौर्य,समुद्रगुप्त, कनिष्क, यशोधर्मा,मिहिरकुल,हर्षवर्धन,जयपाल शाही, अनंगपाल तोमर, तेजा जी,गोगा जी,महाराजा रणजीत सिंह, हरिसिंह नलवा,
पीवी सिंधु, कपिल देव,रेणुका चौधरी, पुलेला गोपीचन्द, छत्रपति शिवाजी_____________

इंटरनेट पर प्रचारित महान गूजरों की सूचि-------------राजा दशरथ, श्रीरामचन्द्र, लक्ष्मण जी,राधा रानी, कृतवर्मा, रोमन,पोरस, मिहिरकुल हूंण, कनिष्क,तोरमाण हूंण,नागभट्ट प्रतिहार, मिहिरभोज प्रतिहार,जयपाल शाही,भोज परमार,भीम सोलंकी, पृथ्वीराज चौहान, बीसलदेव,अनंगपाल तोमर, महाराजा रणजीत सिंह, हरिसिंह नलवा, माता गूजरी, गुज्जर सिंह भँगी,गूजरमल मोदी, सरदार पटेल, गामा पहलवान,दिलीप सिंह जूदेव, कर्नाटक के पूर्व सीएम धर्मसिंह, छत्रपति शिवाजी, प्रतापराव बडगूजर,बाप्पा रावल,महाराणा प्रताप, चंदेल चावड़ा सोलंकी और कलचुरी वंश, मानसिंह तोमर, बॉलीवुड अभिनेता (अक्षय कुमार ,अर्जुन रामपाल, अमीषा पटेल, मुकेश ऋषि), के एम् मुंशी, चिमनभाई पटेल,केशुभाई पटेल,हार्दिक पटेल,
शूटर अपूर्वी चंदेला,पूर्व प्रधानमन्त्री इंद्र कुमार गुजराल _________________
उपरोक्त सभी बकलोली इंटरनेट पर उपलब्ध है और इनपर हमारे जाट गूजर बहुत गर्व करते हैं ,

जबकि मजे की बात यह है कि उपरोक्त प्रसिद्ध नामो में एक भी व्यक्ति न जाट है न गूजर है😊😊😊😊

फिर भी 90% जाट-गूजर इन्हें अपना मानकर छाती चौड़ी किये घूम रहे हैं 😂😂😂😂

बहन साक्षी मलिक ने एक ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया,तो इससे हरियाणा में हिंसा का नंगा नाच और मुरथल गैंगरेप न्यायोचित कैसे हो गया?????
क्या मिला इन जाटवादियों को साजिश करके पहलवान नरसिंह यादव का कैरियर बर्बाद करके????

बहन पीवी सिंधु दक्षिण भारतीय ब्राह्मण है ,और अगली बार गोल्ड जीतकर लाएगी👊👊👊👊

Tuesday, September 6, 2016

क्या बिना मेवाड राजघराने की सहमति के वीरांगना पदमावती का मूवी में गलत चित्रण सम्भव है??

जल्दी ही महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर मूवी आ रही है,
सुना है इसके लिए धोनी को 8 करोड़ रुपया दिया गया है (?)

मिल्खा सिंह (राठौर) को भी उनके जीवन पर बनी मूवी के लिए 2 करोड़ रुपया ऑफर हुआ था,
पर उन्होंने सिर्फ एक रुपया सांकेतिक रूप में लिया था,

किसी भी जिन्दा व्यक्ति के जीवन पर उसी नाम से बिना उसकी अनुमति के बिना स्क्रिप्ट पर सहमति के कोई मूवी नही बन सकती,
हाँ किरदार का नाम बदल दिया जाए और #disclaimer चलाया जाए वो अलग बात है ,

इसी तरह किसी ऐतिहासिक चरित्र पर कोई उसके असली नाम से बनाई जाए तो उसके मौजूदा वंशज चाहें तो निर्माता को अदालत में घसीट सकते हैं

मेवाड़ के महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ और उनके सुपुत्र लक्ष्यराज सिंह इतने प्रभावी हैं कि कोई फ़िल्मी भांड उनके यशस्वी पूर्वजो पर वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं से छेड़छाड़ करके मूवी बना ले ,सम्भव ही नही है!!

ऐसा कोई डायरेक्टर/प्रोड्यूसर/फाइनेंसर बॉलीवुड में नही है जो महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ या कुंवर लक्ष्यराज सिंह को न जानता हो या उनकी बात को टाल सकता हो!!!

आज देशभर का राजपूत समाज संजय लीला भंसाली द्वारा अपनी आने वाली फ़िल्म में वीरांगना पदमावती का गलत चित्रण किये जाने से आहत है और आंदोलन की तैयारी में है!!!

अगर महाराणा मेवाड़ इस मूवी को रुकवाना चाहे या इसकी स्क्रिप्ट में वास्तविक ऐतिहासिक घटना के अनुरूप बदलवाना चाहें तो उनके लिए मामूली बात है,
अगर वो प्रयास नही करते तो क्या ये मान लिया जाए कि इसके लिए उनकी कोई सहमति है????

सूर्यवंशी सम्राट हर्षवर्धन बैंस जिसने सबसे पहले राजपूत (राजपुत्र) उपाधि धारण की थी

सूर्यवंशी क्षत्रिय सम्राट हर्षवर्धन बैंस ने बनवाया था इलाहबाद प्रयाग का किला,
पर इसका श्रेय मिलता है अकबर को!!!!

इन्ही सम्राट हर्षवर्धन बैंस शिलादित्य ने सबसे राजपुत्र उपाधि ग्रहण की थी,जो कालांतर में सभी क्षत्रिय राजकुमारों द्वारा प्रयुक्त की जाने लगी और यह राजपुत्र शब्द क्षत्रिय वर्ण का पर्यायवाची हो गया,
राजस्थान में यही राजपुत्र भाषा के अपभ्रंश के चलते राजपूत हो गया,
और दसवी सदी के पश्चचात् राजपूत समस्त क्षत्रियो के लिए प्रयुक्त होने लगा।।

सम्राट हर्षवर्धन बैंस के वंशज बैस राजपूत कन्नौज के आगे बढ़कर अवध पूर्वांचल बिहार मध्य भारत तक फ़ैल गए,अवध में इनकी बैसवारा नाम से बहुत बड़ी बस्ती है।।

जो बैंस राजपूत थानेश्वर और पंजाब क्षेत्र में ही रह गए वो शनै शनै पंजाब जम्मू कश्मीर में फ़ैल गए,
पाक अधिकृत गुलाम कश्मीर क्षेत्र और आज के पाकिस्तानी पंजाब क्षेत्र में बैस राजपूत मुसलमान बन गए थे और वहां बड़ी मात्रा में मिलते हैं

जम्मू में कई गांव हिन्दू बैस राजपूतो के मिलते हैं
कुछ हिन्दू बैस राजपूत हिमाचल और पंजाब में भी हैं पर पंजाब हरियाणा के अधिकांश बैंस राजपूत बाद में जाट महिलाओ से विवाह करके जाट जाति में मिल गए और पंजाब के सिक्खो में मिलते हैं
हालाँकि ब्रिटिश गजेटियरो में बैंस जाटों ने खुद को जंजुआ राजपूतो की संतान बताया था,

सूर्यवंशी राजपूत सम्राट हर्षवर्धन बैस को नमन
जय राजपूताना  

मेरठ-सहारनपुर मण्डल में सपा बसपा कांग्रेस ने दिखाया राजपूतो को ठेंगा

आगामी विधानसभा चुनावो में वेस्ट यूपी के सहारनपुर, शामली,मेरठ, बागपत,मुजफ्फरनगर जिलों से विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा राजपूतो को दी जाने वाली संभावित उम्मीदवारी का विवरण निम्न प्रकार है

1--सहारनपुर जिला----
कुल विधानसभा सीट--07
बीजेपी के संभावित राजपूत उम्मीदवार--02(देवबन्द,बेहट)
सपा से संभावित उम्मीदवार--शून्य(देवबन्द से श्रीमति मीणा राणा की बजाय गुर्जर उम्मीदवार की चर्चा)
बसपा से राजपूत उम्मीदवार--शून्य
कांग्रेस से राजपूत उम्मीदवार---शून्य
राष्ट्रीय लोकदल से राजपूत उम्मीदवार--शून्य

2--मुजफ्फरनगर-शामली जिला----
कुल विधानसभा सीट--09
बीजेपी के संभावित राजपूत उम्मीदवार--01(थानाभवन)
सपा से संभावित उम्मीदवार--शून्य
बसपा से राजपूत उम्मीदवार--शून्य
कांग्रेस से राजपूत उम्मीदवार---शून्य
राष्ट्रीय लोकदल से राजपूत उम्मीदवार--शून्य

3--मेरठ-बागपत जिला ---
कुल विधानसभा सीट--09
बीजेपी के संभावित राजपूत उम्मीदवार--01(सरधना)
सपा से संभावित उम्मीदवार--शून्य
बसपा से राजपूत उम्मीदवार--शून्य
कांग्रेस से राजपूत उम्मीदवार---शून्य
राष्ट्रीय लोकदल से राजपूत उम्मीदवार--शून्य

तो वेस्ट यूपी के इन 5 जिलों में जो एक दूसरे से जुड़े हैं उनकी कुल 25 सीट में बीजेपी राजपूतो को 04 टिकट दे रही हैं,
वहीँ सपा बसपा कांग्रेस रालोद ढेंगा दिखा रही हैं

इन 5 जिलों के राजपूत किस दल को वोट करें???????
सभी जवाब जरूर दें,

जिन स्वर्गीय राजेन्द्र राणा ने 2003 में बसपा के 40 विधायक तोड़कर मुलायम सिंह की सरकार बनवाई थी,और 2012 में उन्होंने देवबन्द सीट अपने दम पर जीतकर सपा की सहारनपुर जिले में लाज बचाई थी,
उनकी असमय दुखद मृत्यु के बाद सपा उनकी पत्नी श्रीमती मीना राणा का टिकट काटकर क्या सन्देश देना चाहती है????

Saturday, September 3, 2016

स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह न्यांगली,एक जांबाज क्षत्रिय यौद्धा


जय हो,
आज चुरू राजस्थान के क्षत्रिय शेर स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह (राठौर) न्यांगली को आंशिक न्याय मिला है,
06 फ़रवरी 2009 में प्रतिद्वन्दी जाट गिरोह ने धोखे से इनको अकेला पाकर हत्या कर दी थी,जिससे सारे राजस्थान में आग जल उठी थी,

आज जिला व सेशन न्यायाधीश ने इस मामले में श्यामसुन्दर उर्फ सुन्दरिया व सतपाल को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

लेकिन पुलिस की लचर विवेचना और कमजोर पैरवी से इस
मामले मे 4 अन्य अपराधियो को बरी कर दिया गया है।।

चुरू नागौर सीकर झुंझनू शेखावाटी राजस्थान का वो इलाका है जहाँ जाट कुल आबादी में 25% से 35% के बीच है वहीँ राजपूत यहाँ 6% से 8% के बीच है,
स्वतन्त्रता प्राप्ति से पहले इस पुरे इलाके पर राजपूत जमीदारो का जबरदस्त वर्चस्व था,
किन्तु 1947 के बाद सब कुछ बदल गया ,गधे घोड़े एक श्रेणी में आ गये और लोकतन्त्र भीड़तंत्र के रूप में सामने आया,

इसी भीड़ के मामले में बहुत आगे होने का फायदा उठाकर पहले जाटों ने राजनीति में अपना वर्चस्व जमाया वहीँ बाद में प्रशासन और दबंगई में भी वर्चस्व जमा लिया।।

जाट वर्चस्व स्थापित होते ही चुरू नागौर इलाके में जाटों ने अन्य जातियो को सताना शुरू कर दिया और इन नवसामन्तवादियों ने इस इलाके में हर वो जुल्म किये जिनका आरोप ये पहले राजपूतो पर लगाते थे,

जब इनके अत्याचार और मनमानी चरम पर पहुंच गयी तो जिन शेरदिल राजपूतों ने इन्हें इन्ही की भाषा में मुहतोड़ जवाब दिया उनमे अग्रणी थे स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह न्यांगली जी.....

वीरेंद्र सिंह ने कुछ जांबाज राजपूतो के साथ मिलकर इन्हें ऐसी मार लगाई कि इन्हें छुपने को भी जगह ढूंढनी मुश्किल हो गयी,
इस दौरान राजपूत और जाट शराब माफियाओ में जमकर गैंगवार हुई जिनमे राजपूतो का नेतृत्व स्वर्गीय विरेंद्र सिंह न्यांगली ने किया।।
गैंगवार में जाट सरगना सुमेर फगेडिया मारा गया और उसके बाद जाट गिरोह की कमान संभालने वाले विजेंदर टिलिया पर भी जानलेवा हमला हुआ जिसमे वो अपनी आँख गंवा बैठा।।

कुछ दिन बाद जाट गैंग के दारासिंह की चर्चित पुलिस एनकाउंटर में मौत होने पर जाटों ने मंत्री राजेन्द्र राठौर और वीरेंद्र सिंह न्यांगली की मिलीभगत का आरोप लगाया।

वीरेंद्र सिंह ने बसपा में शामिल होकर जाट बाहुल्य क्षेत्र से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था और बेहद मामूली अंतर् से हार गए थे।।

लेकिन 06 फ़रवरी 2009 में वीरेंद्र सिंह को अकेला पाकर जाट गिरोह ने गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी,
जिससे पुरे राजस्थान में आग लग गयी थी।।

इस हत्याकांड से राजपूत पक्ष कमजोर पड़ गया लेकिन अब आनन्दपाल सिंह पटल पर सामने आया जिसने जाटों को फिर से बैकफुट पर ला दिया।

2013 में उनके भाई मनोजसिंह न्यांगली सादुलपुर से जाट उम्मीदवार को हराकर विधायक बने और अपने स्वर्गीय भाई का सपना पूरा किया।
उनपर भी जाट जानलेवा हमला कर चुके है और अभी भी वो जाटों के निशाने पर हैं।।
वो विधायक रहते हुए जज की परीक्षा पास कर चुके हैं पर उन्होंने जज की नोकरी के बजाय समाजसेवा करने का निर्णय लिया है।राजस्थान विधानसभा में राजपूत आरक्षण की सबसे जोरदार मांग मनोज सिंह ने ही उठाई और चुतरसिंह हत्याकांड में भी इन्होंने जमकर बिरोध किया।

आज स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह को आंशिक न्याय मिला है लेकिन नवसामन्तवाद के विरुद्ध सर्वसमाज की जंग में वो हमेशा आदर्श बने रहेंगे,
जब जब समाज में अनीति जुल्म अत्याचार बढेंगे तो कोई न कोई शेरसिंह राणा,वीरेंद्र सिंह न्यांगली जन्म जरूर लेगा।।

🙏🏻🚩वीर वीरेंदर न्यांगली अमर अमर रहे 🙏🏻🚩

भाई तू शेर था, शेर बनकर जिया।।
गीदड़ तो वो थे जिन्होंने झुण्ड में।।
तेरे पे हमला किया।।।।
जय भवानी

राजपूताने के क्षत्रिय शेर देवीसिंह भाटी जिसने समाजहित में सर्वस्व न्यौछावर कर दिया

राजस्थान के क्षत्रिय शेर देवीसिंह भाटी----

देवीसिंह भाटी राजस्थान के राजपूत नेताओं में उन गिने चुने नामो में एक हैं जिन्होंने राजपूत कौम की भलाई के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया,
देवीसिंह भाटी जमीन से जुड़े हुए नेता है और धरतीपुत्र कहे जाते हैं,राजपूत आरक्षण के लिए जितनी जोरदार लड़ाई उन्होंने लड़ी उसने पुरे देश को हिला दिया था,
अगर समाज के गद्दार विश्वासघात न करते तो 2003 में राजपूतो को आरक्षण मिल गया होता और उसके बाद देशभर में राजपूत समाज को आरक्षण का लाभ मिलता,जिससे लाखो युवा बेरोजगार होने से बच जाते।।

जन्म और राजनीति की शुरुवात---
आपका जन्म 31 मई 1945 को हुआ था,
आप 1980 में पहली बार कोलायत विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और लगातार 33 साल विधायक रहे,
कई बार भैरोसिंह शेखावत और वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री भी रहे,ये जनता पार्टी,जनता दल,बीजेपी और निर्दलीय लगातार जीतते रहे।
पर कभी स्वाभिमान से समझोता नही किया।
उनके पुत्र महेंद्र सिंह भाटी 1996 में बीकानेर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद चुने गए थे,

किन्तु उसके बाद इनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब 1998 में विधानसभा चुनाव के तुरन्त बाद इनकी पत्नी और छोटे पुत्र रविन्द्र सिंह की सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गयी।।

एक समय देवीसिंह भाटी जी भैरोसिंह शेखावत के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे,
वो उस समय राजस्थान में सबसे दबंग और लोकप्रिय राजपूत नेता थे,

लेकिन उन्होंने निज स्वार्थ की राजनीती करने की बजाय राजपूत समाज के मान सम्मान और उन्नति की लड़ाई लड़ी,और अपना राजनैतिक कैरियर दांव पर लगा दिया।

जाटों को वाजपेयी/वसुंधरा द्वारा ओबीसी आरक्षण----
अक्टूबर 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वोटबैंक की गन्दी राजनीति के चलते जाटों को भी ओबीसी आरक्षण दे दिया गया था ,जिससे जाटों ने सारा मूल ओबीसी कोटा अकेले ही चट कर दिया और मूल ओबीसी जातियों का सरकारी भर्तियो में सफाया हो गया,
ओबीसी आरक्षण के दम पर जाटों ने पंचायत/स्थानीय निकाय के प्रधान/सरपंच/जिला प्रमुख पदों का बड़ा हिस्सा कब्जा लिया।

तब स्वर्णो और मूल ओबीसी के हको की लड़ाई लड़ने को देवीसिंह भाटी ने सामाजिक न्याय समिति बनाकर उपेक्षित को आरक्षण व् आरक्षित को संरक्षण का नारा दिया और बड़ी रैलियां आयोजित की।
उन्होंने राजपूतो को भी आरक्षण दिलाने को जोरदार लड़ाई लड़ी।।जिसने सरकार को हिला दिया,

इस सम्बन्ध में अमरूदों का बाग़ जयपुर में आयोजित एक रैली में 5 लाख राजपूतो ने भाग लिया और प्रदेश सरकार हिल गयी,बीजेपी सरकार ने मजबूरी में राजपूतो को भी 27% ओबीसी कोटे में शामिल करने  की तयारी कर ली,
लेकिन तभी राजस्थान में वसुंधरा की बीजेपी सरकार ने कुछ गद्दार राजपूतों को पद का लालच दिखाकर अपनी ओर मिला लिया,

तब प्रताप फाउंडेशन जैसे संगठनो,राजेन्द्र सिंह राठौर,भवानी सिंह राजावत,लोकेन्द्र कालवी ,जैसे कई नेताओं ने उस दिन जो आचरण किया और उसके जो परिणाम राजपूतो के लिये हुए वो खानवा के युद्ध में बाबर के हाथो राणा सांगा की हार से भी ज्यादा भयानक थे!!!😢😢

नतीजा--------
राजपूत आरक्षण आंदोलन फ्लॉप हो गया,
और इसके साथ ही देवी सिंह भाटी की राजनीती चौपट हो गयी।।।

अमरूदों का बाग़ की विनाशकारी रैली के बाद ही 2003 में देवी सिंह भाटी को निजी आघात ऐसा लगा कि वो बिलकुल टूट गए,
उनकी पत्नी और छोटे पुत्र रविन्द्र सिंह की तरह ही उनके पुत्र पूर्व सांसद महेंद्र सिंह भाटी जी का भी एक संदिग्ध सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया!!!!!!!

इस आघात ने उन्हें तोड़कर रख दिया उसके बाद वो उबर नही पाए,महेंद्र सिंह के पुत्र आयुष्मान सिंह भाटी अब युवा हो गए हैं और अपने दादा देवीसिंह भाटी जी से राजनीती/समाजसेवा के गुर सीख रहे हैं

यह क्षत्रिय शेर अब बुजुर्ग हो गए हैं लेकिन समय समय पर अपने तेवर दिखाकर सरकार को झुकाने और अपने क्षेत्र/समर्थको की लड़ाई लड़ने में पूर्ण सक्षम हैं।

काश राजपूत समाज में चन्द गद्दार न होते????
काश पुरे राजपूत समाज ने उस समय देवीसिंह भाटी का साथ दिया होता!!!!!

अमरूदों का बाग़ की रैली के गद्दार आज भी राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनो में बड़े पदों पर बैठकर समाज को धोखा दे रहे हैं ,
हाल ही में चतरसिंह हत्याकांड मुद्दे पर भी इन्ही काली भेड़ो ने वसुंधरा सरकार का दलाल बनकर समाज के आंदोलन को कुचलने का कुचक्र रचा है।।

इन्ही काली भेड़ो ने जोधा अकबर के मुद्दे पर भी समाज को धोखा दिया था,
इन्होंने ही राजपूत आरक्षण आंदोलन की धार को कुंद किया और खुद के ही बनाए करणी सेना नाम के संगठन को बर्बाद कर दिया।।

और यही काली भेड़ें हाल ही में समाज से बहिष्कृत महल की स्वार्थ की लड़ाई में उनका साथ देती दिखाई दी,क्योंकि उससे इनके भी स्वार्थ जुड़े थे वहीँ लाङनु में गरीब राजपूत घर की बेटी नीतू राठौर ,
जिसने जाट छात्रो और अध्यापक के उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी ,
उसका परिवार आज भी न्याय की बाट जौह रहा है क्योंकि राजपूत संगठन महल की लड़ाई लड़ने में व्यस्त है !!!!!

काश राजस्थान में कुछ और देवीसिंह भाटी होते!!!!!!!

Friday, September 2, 2016

जब ठाकुर विजयपाल सिंह ने हरा दिया था चौधरी चरणसिंह को



मुजफ्फरनगर शामली जिले की राजनीति में राजपूतों की भूमिका---

आज मुजफ्फरनगर शामली की राजनीति में राजपूत समाज हाशिए पर है,जनपद में मुस्लिम, जाट, गुर्जरो का वर्चस्व है इनके बाद सैनियों का नम्बर आता है
कभी ताकतवर रहे त्यागी समाज की भी कोई विशेष भूमिका अब दिखाई नही देती,

किन्तु राजपूत समाज एक समय जनपद मुजफ्फरनगर शामली की राजनीति में अग्रणी भूमिका में था,जिसपर आज विश्वास करना मुश्किल है,

आप खुद राजपूतो की घटती हुई शक्ति पर नजर डालिये-----

1--1952 व् 1957 में कोई राजपूत या गुज्जर न सांसद बन पाया न ही कोई विधायक बन पाया,सांसद की 2 सीटों पर ब्राह्मण बनियो मुस्लिमो का वर्चस्व रहा,वहीँ इन वर्षो में 2-2 जाट विधायक विधानसभा पहुंचे।

2--1962 में राजपूतों ने जोरदार प्रदर्शन किया,

A--1962 में जाट मुस्लिम गुज्जर बाहुल्य कैराना लोकसभा सीट से ठाकुर यशपाल सिंह (पनियाला रुड़की निवासी) ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया,

B--1962 में ही जाट बाहुल्य बुढ़ाना विधानसभा सीट से ठाकुर विजयपाल सिंह कछवाह ने सीपीआई के टिकट पर जीत हासिल की।

वहीँ थानाभवन विधानसभा सीट से कांग्रेस के ठाकुर रामचन्द्र सिंह पुण्डीर ने जीत हासिल की।

इस वर्ष भी कोई जाट गुज्जर लोकसभा नही पहुंच पाए, गुज्जर विधानसभा इस बार भी नही जा पाए,वहीँ 2 जाट विधायक जीते,
इस प्रकार 1962 में मुजफ्फरनगर शामली जिले में राजपूतों का वर्चस्व रहा।

3--1967 में लोकसभा की दोनों सीट मुस्लिम जीते,
वहीँ थानाभवन विधानसभा सीट से ठाकुर रामचन्द्र सिंह पुण्डीर दोबारा विजयी हुए,
इस वर्ष भी कोई गुर्जर विधानसभा में नही पहुंच पाया,वहीँ 2 जाट विधायक चुने गए।।

4--1969 में मध्यावधि चुनाव हुए जिनमे सभी विधानसभा सीट चौधरी चरण सिंह की बीकेडी ने जीती,कोई राजपूत विधायक नही बन पाया,
थानाभवन से मुस्लिम राजपूत विधायक बना,
वहीँ पहली बार गुज्जर विधायक जीत पाया,2 जाट भी विधायक बने।

5--1971 में राजपूतों ने इतिहास रच दिया,जब ठाकुर विजयपाल सिंह कछवाह (बिराल) ने जाट बाहुल्य मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चौधरी चरण सिंह जैसे राष्ट्रीय नेता को हरा दिया,इस हार की टीस अभी तक जाट नेताओं में है।

6--1974 विधानसभा चुनाव में राजपूतो ने वापसी की,
जाट गुज्जर बाहुल्य सीट कांधला से ठाकुर मूलचन्द (bkd)और थानाभवन सीट से ठाकुर मलखान सिंह (कांग्रेस)विधायक बने

वहीँ इस बार 2 जाट और 2 गुज्जर विधायक भी बने।

7--1977 में लोकसभा चुनाव में पहली बार कोई जाट सांसद बन पाया।इसके बाद मुजफ्फरनगर शामली में सांसद की दोनों सीटो पर मुस्लिम और जाटों का एकाधिकार सा हो गया।

1977 विधानसभा चुनाव में थानाभवन सीट पर ठाकुर मूलचन्द जनता पार्टी से विधायक बने,
जबकि 2 गुज्जर और 2 जाट भी विधायक बने,
इस प्रकार जाट गुज्जरों के वर्चस्व की शुरुवात इसी चुनाव से हुई।

8--1980 में लोकसभा की 1 सीट व् विधानसभा की 1 सीट पर जाट विजयी हुआ,वहीँ 2 विधायक गुज्जर बने,

इसी चुनाव में जाटों के बेहद मजबूत गढ़ बघरा विधानसभा सीट से बाहुबली ठाकुर नकली सिंह पुण्डीर (भमेला निवासी) जीत गए,आज तक इस सीट से इकलौते गैर जाट विधायक यही हैं

9--1984 व् 1985 में कोई राजपूत न विधायक न ही सांसद बन पाया,
जाट समाज से 1 सांसद और 2 विधायक जाट, व् 2 गुज्जर विधायक बने।।

10--1989 में जनता दल की लहर में ठाकुर नकली सिंह पुण्डीर थानाभवन विधानसभा सीट से जीते,

वहीँ 2 जाट और 1 गुज्जर विधायक बने,1 सांसद भी जाट जीते।।

11--1991 में लोकसभा की दोनों सीट पर जाट जीते,वहीँ विधानसभा में भी 2 जाट और 2 गुज्जर जीते,

राजपूतो का इस चुनाव में सफाया हो गया।

12-- 1993 में 3 जाट और 1 गुज्जर विधायक बना,
जबकि थानाभवन सीट से ठाकुर जगत सिंह चौहान (चौसाना) बीजेपी से विधायक बने।।

13--1996 में 1 सांसद और 1 विधायक जाट समाज से जीता ,वहीँ 3 गुज्जरों ने जीतकर जाटों को सोचने को मजबूर कर दिया,पहली बार 1 सैनी भी विधायक बना,

इस चुनाव में कोई राजपूत नही जीत पाया,लेकिन बाद में थानाभवन सीट पर हुए उपचुनाव में ठाकुर जगत सिंह ने सपा के टिकट पर जीत हासिल की।

बस इसके बाद जनपद मुजफ्फरनगर शामली की राजनीति में राजपुतो का महत्व लगभग समाप्त सा हो गया।

लगभग डेढ़ दशक तक कोई राजपूत यहाँ से विधायक नही बन पाया,
2012 में फिर से बीजेपी के टिकट पर लोकप्रिय नेता ठाकुर सुरेश राणा ने बेहद मामूली अंतर से थानाभवन सीट से विजय हासिल की,

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर मेरठ की सरधना विधानसभा जोड़ देने से इस सीट पर राजपूत मत लगभग डेढ़ लाख हो गए हैं जो मुसलमानो दलितों और जाटों के बाद चौथे नम्बर पर हैं तो भविष्य में इस लोकसभा सीट पर राजपूतो को नजर रखने की आवश्यकता है,

इस प्रकार हम देखते हैं कि जाट मुस्लिम गुज्जर बाहुल्य मुजफ्फरनगर शामली जिले में राजपूतो की कम जनसँख्या के बावजूद राजपूत अपने जुझारूपन से राजनीति में स्थान बनाए रहे,

यहाँ राजपूत जाट बाहुल्य कांधला बुढ़ाना बघरा सीटो से विधायक भी बने और थानाभवन विधानसभा सीट पर वर्चस्व बनाए रखा,

लोकसभा में भी बेहद कम वोट के बावजूद दोनों सीटो पर राजपूतो ने अपने दम पर जीत हासिल की।।

अब पुन यहाँ के राजपूतो को एकजुट होकर राजनीति में अपना स्थान बनाए रखने के प्रयास बेहद आवश्यक है

सर्वश्रद्धेय ठाकुर विजयपाल सिंह कच्छवाह,ठाकुर यशपाल सिंह ,ठाकुर रामचन्द्र सिंह पुण्डीर, ठाकुर नकली सिंह पुण्डीर, ठाकुर मूलचन्द जी को शत शत नमन

संजय लीला भंसाली को सबक सिखाने के मूड में देशभर का राजपूत समाज

----------जय भवानी,खुशखबरी-------------
राजपूत समाज संजय लीला भंसाली को सिखाएगा सबक,

संजय लीला भंसाली द्वारा अपनी आने वाली मूवी में वीरांगना महारानी पदमावती का गलत चित्रण के मुद्दे पर मेवाड़ राजघराने की चुप्पी पर हमने अपना विरोध दर्ज करवाया गया था,
हमारा यह विरोध हुकुम Kunwar Sandeep Singh Tanwar जी द्वारा मेवाड़ के राजपूत संगठनो और राजपरिवार तक भी पहुंचा दिया गया है 👊👊👊👊
और उन्हें बताया गया कि इस मुद्दे पर राजपरिवार की चुप्पी से पुरे देश के राजपूत युवाओं में आक्रोश है,

संदीप तंवर जी ने बताया है कि मेवाड़ राजपूत समाज इस मुद्दे पर बहुत जल्दी इसी सप्ताह लीगल नोटिस संजय लीला भंसाली को भेज रहा है, मेवाड़ राजपरिवार भी अब इसमें क़ानूनी कार्यवाही की तैयारी में है,
इस सम्बन्ध में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सीपी जोशी से भी बात की गयी है,सभी ने एक स्वर से कहा है कि इतिहास से छेड़छाड़ बिलकुल नही होने दी जाएगी,

आदरणीय संदीप तंवर जी द्वारा हमे थोडा संयम रखने और राजपरिवार के प्रति कटु शब्द इस्तेमाल न करने की बात कही है जिसे हम स्वीकार करते हैं और पूर्व में इस्तेमाल किये गए किसी भी कटु शब्द पर खेद व्यक्त करते हैं,
जो भी राजघराने क्षत्रिय परम्परा पर चलते रहेंगे और क्षत्रिय समाज के संघर्ष में साथ होंगे उनका सदैव सम्मान था,सम्मान है और सम्मान रहेगा 💐💐

संदीप तंवर जी के प्रयास और मेवाड़ के राजपूत समाज/सर्वसमाज और मेवाड़ राजपरिवार के इस प्रयास को दिल की गहराइयो से नमन💐??

जय भवानी----
#धीर_सिंह_पुण्डीर की वॉल से साभार

क्या प्रायोजित सर्वे से योगी आदित्यनाथ का रास्ता रोकने कि साजिश हो रही है बीजेपी में ??

मित्रों हाल में  एबीपी न्यूज़ पर यूपी विधानसभा चुनाव का जो सर्वे दिखाया वो किसी खास उद्देश्य को लेकर प्रायोजित था और वो उद्देश्य था योगी आदित्यनाथ को बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने से रोकना👎👎👎👎
सर्वे में अंतिम अनुमान के अनुसार इस समय समाजवादी पार्टी को पहले स्थान पर दिखाया गया है जो सही है,लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए पसन्द व विभिन्न सामाजिक वर्गों की संख्या और उनके रुझानों में दावे निराधार है,
सर्वे के विभिन्न बिंदुओं से मेरी सहमति/असहमति निम्न प्रकार है।
1--मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता जान बूझकर कमतर दिखाई गयी है,भले ही बीजेपी ने अभी किसी को इस पद के लिए प्रोजेक्ट न किया हो,
अखिलेश यादव और मायावती को 24-24% मतदाताओ की पहली पसन्द बताया गया है जो उनके समर्थक वर्गों के अनुसार सही है।।
लेकिन शेष 52% मतदाताओं में कम से कम से कम 30% की पहली पसन्द योगी आदित्यनाथ हैं
इस प्रायोजित सर्वे में योगी को कमतर दिखाने हेतु बीजेपी के कुछ नेताओं का हाथ भी अवश्य होगा।।
2--सर्वे में यूपी में स्वर्ण हिन्दू मतदाताओं की संख्या मात्र 18% बताई गयी जबकि यूपी में स्वर्ण हिंदुओं की कुल संख्या 24% से कम कदापि नही हैं जिनमे 9% ब्राह्मण, 8% राजपूत,
5% वैश्य,जैन,कायस्थ,खत्री,पंजाबी,सिंधी,सिक्ख आदि,2% त्यागी,भूमिहार व् अन्य स्वर्ण हैं।
सर्वे में मात्र स्वर्णो का 55% बीजेपी के समर्थन में बताया गया,
जबकि स्वर्णो का न्यूनतम 70% समर्थन इस समय बीजेपी के साथ है,यह आगे और भी बढ़ सकता है,हाँ व्यापारी वर्ग खुश नही है और कांग्रेस भी ब्राह्मणों पर डोरे डाल रही है।।
स्वर्णो के 24% वोट में-----
बीजेपी--14%
सपा--4%
कांग्रेस--4%
बसपा--2%
------------------------------------------------------
अहीर वोट----कुल 9%
सर्वे में अहीरों का मात्र 68% समर्थन सपा के लिए दिखाया गया है जबकि 80% अहीर सपा के साथ हैं,अहीरों को सपा शासन में जमकर उपकृत किया गया इसलिए सबल अहीर मतदाता खुलकर सपा के साथ है।।
अहीर वोट 9% में मेरे अनुमान से-----
बीजेपी--1%
सपा--7.5%
कांग्रेस--
बसपा--0.5%
------------------------------------------------
गैर अहीर ओबीसी--27% (जबकि सर्वे में इन्हें 33% दिखाया गया)
सर्वे में गैर अहीर ओबीसी का मात्र 38% बीजेपी, 23% बसपा और 19% सपा के साथ दिखाए गए,
जबकि अति पिछड़ी जातियां लगभग एकतरफा बीजेपी के पक्ष में हैं इस वर्ग में जाट गूजर कुर्मी जैसे सबल वर्ग ही खुलकर बीजेपी के साथ नही हैं जबकि मुराव काछी माली सैनी खुलकर बीजेपी के साथ है
गैर अहीर ओबीसी में 27% में-------
बीजेपी--13%
सपा--6%
कांग्रेस--2%
बसपा--6%
-------------------------------------------------------------
जाटव वोट 15%------
सर्वे में 75% जाटव वोट बसपा के पक्ष में दिखाया है जबकि यह वर्ग बहुत उग्रता से खुलकर बसपा के साथ है यह आंकड़ा 90% होगा,इनका मत प्रतिशत भी जबरदस्त होगा।इस वर्ग को बसपा सरकारो में जमकर उपकृत किया गया,इसलिए यह वर्ग खुलकर बसपा के साथ है
जाटव वोट 15% में---
बीजेपी--1%
सपा--0.5%
कांग्रेस--0.5%
बसपा--13%
----------------------------------------------------
गैर जाटव दलित/जनजाति----6%
सर्वे में गैर जाटव दलित मतों में भी बसपा की बढ़त दिखाई गयी जो गलत है गैर जाटव दलितों का अधिकांश मत बीजेपी के साथ हमेशा से रहा है
गैर जाटव दलित/जनजाति वर्ग 6% में----
बीजेपी--3%
सपा--1%
कांग्रेस--0.5%
बसपा--1.5%
-----------------------------------------------------
मुस्लिम वोट---19%
सर्वे में मुस्लिम मतो का 4% बीजेपी को दिखाया जो एकदम गलत है, 0.5% भी बीजेपी के साथ नही है
62% मुस्लिम सपा के साथ दिखाए गए और 18% बसपा के साथ,
जबकि बसपा ने 130 टिकट मुस्लिमो को दिए हैं तो बसपा के लिए मुस्लिम का समर्थन बढ़ भी सकता है
मुस्लिमो के 19% में------
बीजेपी--0.5%
सपा--11%
कांग्रेस--2%
बसपा--5.5%
--------------------------------------------------
इस प्रकार कुल आंकड़ा इस प्रकार होगा
बीजेपी----33.5%
सपा----30%
कांग्रेस---8%
बसपा--28.5%
लेकिन इस आंकड़े में एक पेंच यह कि जाटव अहीर और मुस्लिम मतो का मतदान प्रतिशत बहुत जबरदस्त होता है जबकि बीजेपी समर्थको का मतदान प्रतिशत कम रहता है
इसके अलावा निर्दलीय भी जरूर वोट काटेंगे तो इन सब समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संशोधित आंकड़ा यह होगा।।
बीजेपी--31%
सपा--30%
कांग्रेस--8%
बसपा--28%
अन्य--3%
इन आंकड़ो से सीटो का अनुमान 
बीजेपी--130--140 
सपा---120--130
कांग्रेस--20--25
बसपा--100--110
निर्दलीय व् अन्य--5--7
इस प्रकार अभी किसी दल को बहुमत नही मिल रहा है,न ही कोई गठबंधन बनता दिख रहा है।।
बीजेपी अगर योगी आदित्यनाथ को सीएम उम्मीदवार बनाती है तो बीजेपी समर्थको का मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और ध्रुवीकरण से बीजेपी की 40-50 सीट और बढ़ सकती हैं,और बीजेपी सरकार बनाने के नजदीक पहुंच सकती है।।
सपा को स्वर्ण हिन्दू विशेस्कर ठाकुर वोट तभी अतिरिक्त मिल पाएगा जब बीजेपी सीएम उम्मीदवार के लिए गलत निर्णय लेती है उस स्थिति में सपा की अतिरिक्त 25 अधिकतम सीट और बढ़ सकती हैं इस स्थिति में सपा कांग्रेस और निर्दलीय मिलकर जादुई आंकड़े तक पहुंच सकते हैं
बसपा के पक्ष में अगर मुस्लिमो का ध्रुवीकरण 70% तक हो गया तो बसपा को 70 सीट और बढ़ सकती हैं जिससे बसपा और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकती हैं
लेकिन आज वाला ही आंकड़ा रहा तो बसपा के जीतने वाले 100 विधायको में 55-60 के करीब मुस्लिम होंगे,जो टूटकर सरकार बनाने के लिए सपा के साथ जा सकते हैं और यही सर्वाधिक सम्भावना मुझे नजर आ रही है
कुल मिलाकर बिना किसी लहर के भी बीजेपी के साथ उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा समर्थन है पर लहर के आभाव में मुखर नही है और 2014 में बनी बनाई लहर को अपनी कार्यप्रणाली से खत्म करने के लिए केंद्र में मोदी सरकार का जुमलेबाजी वाला प्रदर्शन और बदली विचारधारा सर्वाधिक उत्तरदायी है,
यह सम्भावना भी है कि खण्डित जनादेश आने की सूरत में केंद्र/राजसभा में बसपा का सहयोग पाने और दलित हितैषी की इमेज चमकाने के लिए मोदी जी अटल आडवाणी की तरह यूपी में मायावती को समर्थन दे दें,भले ही इसके बाद यूपी में बीजेपी हमेशा के लिए समाप्त हो जाए।।
बीजेपी इस बार यूपी में सरकार बनाने से चुकती है तो इसके लिए नरेंद्र मोदी जी ही पूर्ण रूप से उत्तरदायी होंगे।।
जय हिन्द।।